डीएम ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, कहा- कागजों पर नहीं धरातल पर दिखे शिकायतों का समाधान
आज का चौपाल | जिला संवाददाता संजय दीक्षित
महोबा। जनपद की तीनों तहसीलों में शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। अधिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे फरियादियों की समस्याएं सुनीं। तीनों तहसीलों में कुल 263 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन इनमें से महज 14 शिकायतों का ही मौके पर निस्तारण हो सका। जिलाधिकारी प्रभास कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए।
महोबा तहसील में जिलाधिकारी प्रभास कुमार की अध्यक्षता में जनसुनवाई आयोजित हुई। इस दौरान पुलिस अधीक्षक शशांक सिंह, मुख्य विकास अधिकारी बलराम कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। महोबा तहसील में कुल 110 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 9 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया।

इसी क्रम में कुलपहाड़ तहसील में समाधान दिवस के दौरान 80 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 2 शिकायतों का मौके पर समाधान किया गया। वहीं चरखारी तहसील में कुल 73 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 3 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया।
चरखारी तहसील में मंडलायुक्त अजीत कुमार एवं डीआईजी चित्रकूटधाम मंडल एस. राजेश की मौजूदगी में जनसुनवाई हुई। अधिकारियों ने फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए। शेष शिकायतों का एक सप्ताह के भीतर गुणवत्तापूर्ण और विधिक तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए गए।
समाधान दिवस के दौरान जल निगम, लोक निर्माण विभाग, चिकित्सा विभाग और विद्युत विभाग से जुड़ी शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से संबंधित शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता की भी जांच कराई जाएगी। यदि किसी मामले में फर्जी निस्तारण, गलत रिपोर्ट या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों की वास्तविक स्थिति का मौके पर सत्यापन करने और फरियादियों को प्रभावी राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
डीएम ने लेखपालों को भी गांवों में नियमित रूप से जाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनने तथा उनका नियमानुसार समाधान कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल शिकायतें दर्ज करना नहीं, बल्कि पात्र लोगों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण राहत उपलब्ध कराना है।

