गोरखपुर, संवाददाता। सीएम योगी ने पीआरडी जवानों के लिए नई घोषणा की। कहा कि 1948 में गठित पीआरडी के स्वयंसेवकों को 2019 तक 250 रुपये दैनिक ड्यूटी भत्ता मिलता था। 2019 में उन्होंने इसे बढ़ाकर 375 रुपये और 2022 में बढ़ाकर 395 रुपये किया था। 2025 में भत्ता वृद्धि फिर से की और बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “अब पीआरडी स्वयंसेवकों का भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन करने जा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवानों को बड़ी सौगात दी। इन जवानों को सपरिवार प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये के मुफ्त इलाज से आच्छादित करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने उनके दैनिक ड्यूटी भत्ते में वृद्धि करने की घोषणा की।
अपने कार्यकाल में इससे पूर्व तीन बार ड्यूटी भत्ता बढ़ा चुके मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर में आयोजित पीआरडी जवानों के सम्मेलन में चौथी बार वृद्धि का ऐलान करते हुए कहा कि अब पीआरडी जवानों को 500 रुपये की जगह प्रतिदिन 600 रुपये ड्यूटी भत्ता दिया जाएगा।
मंगलवार को योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित पीआरडी जवानों के सम्मेलन में सीएम योगी ने पीआरडी स्वयंसेवकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा कार्ड का वितरण कर ‘मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही रिमोट का बटन दबाकर लखनऊ में करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बहुमंजिला पीआरडी बैरक का शिलान्यास भी किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने पीआरडी जवानों के लिए नई घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1948 में गठित पीआरडी के स्वयंसेवकों को 2019 तक 250 रुपये दैनिक ड्यूटी भत्ता मिलता था। 2019 में उन्होंने इसे बढ़ाकर 375 रुपये और 2022 में बढ़ाकर 395 रुपये किया था।
2025 में भत्ता वृद्धि फिर से की और बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, “अब पीआरडी स्वयंसेवकों का भत्ता 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन करने जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि पीआरडी जवानों के लिए 75 वर्ष में भत्ता राशि 250 रुपये तक ही थी, जबकि विगत आठ वर्ष में ही यह 250 से बढ़कर 600 रुपये होने जा रहा है। यह वृद्धि सौ प्रतिशत से भी अधिक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित कराने के लिए पुलिस और प्रशासन के सहयोग से पीआरडी के स्वयंसेवक अपनी भूमिका समर्पण भाव से निभाते हैं। पर, इसके बावजूद 2017 से पहले तक उन्हें ड्यूटी नहीं मिलती थी, जबकि आज उनके महत्व को समझा गया तो ड्यूटी के लिए जवान कम पड़ रहे हैं।


