‘एक नागरिक, एक वोट’ को निष्पक्ष चुनाव की नींव बताया, एसआईआर को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना
नई दिल्ली। एजेंसी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक नागरिक, एक वोट’ को निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद जनादेश का अपमान करना कांग्रेस की पुरानी आदत रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को बदनाम करना और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना कांग्रेस के डीएनए में है।
शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साधा।
उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस चुनाव जीतती है तो चुनाव आयोग सही होता है और चुनाव हारने पर वही आयोग गलत कैसे हो जाता है? शिवराज ने कांग्रेस से यह भी पूछा कि कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस चुनाव कैसे जीत गई थी।
ईवीएम के विरोध पर भी सवाल
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की ओर से मतपत्र के जरिए चुनाव कराने की मांग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और इससे मतदाताओं का भरोसा मजबूत हुआ है।
शिवराज ने कहा कि मतपत्र से चुनाव कराने की मांग देश को फिर 1980 और 1990 के दशक की व्यवस्था की ओर ले जाने वाली है। उन्होंने उस दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय मतपेटियां लूटे जाने और एक व्यक्ति द्वारा कई मतपत्रों पर मुहर लगाने जैसी घटनाओं की शिकायतें सामने आती थीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस देश को फिर उसी दौर में ले जाना चाहती है।
चुनावी पारदर्शिता पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘एक नागरिक, एक वोट’ ही निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी शर्त है। उनके मुताबिक मतदाता सूची में सही और आवश्यक बदलाव होने से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होती है तथा मतदाताओं का विश्वास बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यवस्था में खामियां हैं तो उन्हें सुधारने की जरूरत है, लेकिन पूरी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को ही कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस के आरोपों का भी जिक्र
मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बीच शिवराज ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी आपातकाल लगाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर चुकी है और अब संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
शिवराज ने कहा कि संस्थाओं और व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत हो सकती है, लेकिन उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर देश को अराजकता की ओर ले जाना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।
उन्होंने एक बार फिर कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है। सही मतदाता सूची और प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास कायम रह सकता है।नई दिल्ली। एजेंसी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक नागरिक, एक वोट’ को निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद जनादेश का अपमान करना कांग्रेस की पुरानी आदत रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को बदनाम करना और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना कांग्रेस के डीएनए में है।
शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साधा।
उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस चुनाव जीतती है तो चुनाव आयोग सही होता है और चुनाव हारने पर वही आयोग गलत कैसे हो जाता है? शिवराज ने कांग्रेस से यह भी पूछा कि कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस चुनाव कैसे जीत गई थी।
ईवीएम के विरोध पर भी सवाल
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की ओर से मतपत्र के जरिए चुनाव कराने की मांग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और इससे मतदाताओं का भरोसा मजबूत हुआ है।
शिवराज ने कहा कि मतपत्र से चुनाव कराने की मांग देश को फिर 1980 और 1990 के दशक की व्यवस्था की ओर ले जाने वाली है। उन्होंने उस दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय मतपेटियां लूटे जाने और एक व्यक्ति द्वारा कई मतपत्रों पर मुहर लगाने जैसी घटनाओं की शिकायतें सामने आती थीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस देश को फिर उसी दौर में ले जाना चाहती है।
चुनावी पारदर्शिता पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘एक नागरिक, एक वोट’ ही निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी शर्त है। उनके मुताबिक मतदाता सूची में सही और आवश्यक बदलाव होने से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होती है तथा मतदाताओं का विश्वास बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यवस्था में खामियां हैं तो उन्हें सुधारने की जरूरत है, लेकिन पूरी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को ही कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस के आरोपों का भी जिक्र
मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बीच शिवराज ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी आपातकाल लगाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर चुकी है और अब संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
शिवराज ने कहा कि संस्थाओं और व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत हो सकती है, लेकिन उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर देश को अराजकता की ओर ले जाना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।
उन्होंने एक बार फिर कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है। सही मतदाता सूची और प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास कायम रह सकता है।नई दिल्ली। एजेंसी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक नागरिक, एक वोट’ को निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद जनादेश का अपमान करना कांग्रेस की पुरानी आदत रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को बदनाम करना और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना कांग्रेस के डीएनए में है।
शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साधा।
उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस चुनाव जीतती है तो चुनाव आयोग सही होता है और चुनाव हारने पर वही आयोग गलत कैसे हो जाता है? शिवराज ने कांग्रेस से यह भी पूछा कि कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस चुनाव कैसे जीत गई थी।
ईवीएम के विरोध पर भी सवाल
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की ओर से मतपत्र के जरिए चुनाव कराने की मांग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और इससे मतदाताओं का भरोसा मजबूत हुआ है।
शिवराज ने कहा कि मतपत्र से चुनाव कराने की मांग देश को फिर 1980 और 1990 के दशक की व्यवस्था की ओर ले जाने वाली है। उन्होंने उस दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय मतपेटियां लूटे जाने और एक व्यक्ति द्वारा कई मतपत्रों पर मुहर लगाने जैसी घटनाओं की शिकायतें सामने आती थीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस देश को फिर उसी दौर में ले जाना चाहती है।
चुनावी पारदर्शिता पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘एक नागरिक, एक वोट’ ही निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी शर्त है। उनके मुताबिक मतदाता सूची में सही और आवश्यक बदलाव होने से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होती है तथा मतदाताओं का विश्वास बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यवस्था में खामियां हैं तो उन्हें सुधारने की जरूरत है, लेकिन पूरी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को ही कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस के आरोपों का भी जिक्र
मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बीच शिवराज ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले भी आपातकाल लगाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर चुकी है और अब संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
शिवराज ने कहा कि संस्थाओं और व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत हो सकती है, लेकिन उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर देश को अराजकता की ओर ले जाना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।
उन्होंने एक बार फिर कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है। सही मतदाता सूची और प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास कायम रह सकता है।

