साइबर थाना पुलिस ने ककोर बंबा के पास दबोचा, ठगी में इस्तेमाल तीन एंड्रॉयड मोबाइल बरामद
औरैया संवाददाता। बिजली चोरी के मामले में मुकदमा दर्ज न करने और फर्जी सेटलमेंट कराने के नाम पर पुलिस अधिकारी की पहचान का दुरुपयोग कर ठगी करने वाले गिरोह का साइबर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ककोर बंबा के पास से फर्जी दरोगा समेत दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए गए तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, बीती 20 अगस्त को प्रवर्तन दल (विद्युत विभाग) के अवर अभियंता होरीलाल की संयुक्त टीम ने कोतवाली औरैया क्षेत्र के ग्राम निगड़ा में चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान उपभोक्ता ओमकांत चतुर्वेदी को बिजली चोरी करते हुए पाया गया। इसके बाद 21 अगस्त को थाना विद्युत चोरी निरोधक में उपभोक्ता के खिलाफ भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। मुकदमे का नंबर 642/2026 बताया गया है।
अगले ही दिन आया ठगी का फोन
मामला दर्ज होने के अगले दिन यानी 22 अगस्त को ओमकांत के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। ट्रूकॉलर पर कॉल करने वाले का नाम दरोगा कृष्णकांत प्रजापति दिखाई दे रहा था। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए ओमकांत से मुकदमा खत्म कराने के बदले 15 हजार रुपये की मांग की।
आरोपी ने पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए व्हाट्सऐप पर एक क्यूआर कोड भी भेजा और रकम उसके माध्यम से भेजने के लिए कहा। मामले में संदेह होने पर पीड़ित उपभोक्ता ने तत्काल इसकी जानकारी विद्युत विभाग के अवर अभियंता को दी। इसके बाद अवर अभियंता की तहरीर पर साइबर थाने में बीएनएस और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
तकनीकी साक्ष्यों से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना प्रभारी राजीव कुमार और उपनिरीक्षक हेमंत चौधरी की टीम ने तकनीकी एवं मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस टीम ने मध्य प्रदेश के जिला निवाड़ी स्थित थाना पृथ्वीपुर क्षेत्र के गांव ज्योरामोरा निवासी कृष्णकांत यादव और थाना पृथ्वीपुर क्षेत्र के गांव गोवा पश्चिम निवासी मोहित यादव को ककोर बंबा के पास से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने साइबर ठगी के तरीके का खुलासा किया। पुलिस के अनुसार गिरोह का एक साथी यूपी कॉप जैसे ऑनलाइन माध्यमों से दर्ज मुकदमों के आरोपियों के नाम, पते और मोबाइल नंबर निकालकर उन्हें उपलब्ध कराता था।
इसके बाद आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी या दरोगा बताकर पीड़ितों को फोन करते थे। मुकदमा खत्म कराने अथवा मामले में समझौता कराने के नाम पर उनसे पैसे की मांग की जाती थी। ठगी की रकम फर्जी नाम और लालच देकर खुलवाए गए बैंक खातों में क्यूआर कोड के माध्यम से मंगाई जाती थी।
पुलिस ने शुरू की आगे की जांच
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है। बरामद मोबाइल फोन की तकनीकी जांच के जरिए आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों और संभावित अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी मुकदमे या पुलिस कार्रवाई को खत्म कराने के नाम पर यदि कोई व्यक्ति फोन पर पैसे मांगता है तो तत्काल संबंधित थाना या साइबर पुलिस को इसकी सूचना दें। किसी अज्ञात व्यक्ति के भेजे क्यूआर कोड पर रकम भेजने से पहले उसकी पूरी तरह जांच करना भी जरूरी है।

