कानपुर: केशवपुरम में महिला की हत्या कर लूट की सनसनीखेज वारदात
कानपुर के केशवपुरम में हुई उमा की हत्या कर लूट की वारदात में यह खुलासा हुआ है कि बदमाशों को घर की पूरी जानकारी थी। लुटेरों ने चाबी से अलमारी खोली और सिर्फ बड़े बेटे अमरीश की अलमारी को निशाना बनाया, जबकि छोटे बेटे की अलमारी को छुआ तक नहीं। लॉकर को किसी नुकीली चीज से तोड़ा गया था।
कानपुर में केशवपुरम के हसनपुर में हुई उमा की हत्या और लूट के आरोपियों को घर की पूरी जानकारी थी। उन्हें पता था कि गहने और नकदी कहां रखी हुई है। यहां तक कि उन्हें बड़े बेटे की अलमारी की चाबी की जानकारी भी थी।
बड़े बेटे की ही अलमारी टूटी मिली
घटना के बाद उमा के पति शिवमंगल जैसे ही घर पहुंचे, उन्हें बड़े बेटे अमरीश की ही अलमारी टूटी हुई मिली, जबकि छोटे बेटे आशीष की अलमारी को लुटेरों ने छुआ भी नहीं था।
शिवमंगल के मुताबिक, अलमारी में बड़े बेटे की पत्नी नेहा और उमा के जेवर थे। अलमारी की चाबी घर में एक सुरक्षित स्थान पर रखी जाती थी।
अलमारी चाबी से खोली गई, लॉकर तोड़ा गया
अलमारी चाबी से खोली गई है, लेकिन जेवर वाले लॉकर को किसी नुकीली चीज से तोड़ा गया है।
अमरीश पिछले नौ साल से पत्नी नेहा के साथ मसवानपुर स्थित दूसरे मकान में रह रहा है। उसी मकान के नीचे बनी मार्केट की एक दुकान में पिता-पुत्र बुक स्टॉल चला रहे हैं।
महीने के खर्च को लेकर हुआ था विवाद
अमरीश का तीन माह पहले अपनी पत्नी नेहा से महीने के खर्च को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद नेहा दोनों बच्चों को लेकर गोविंदनगर स्थित मायके चली गई थी।
मंगलवार रात जब वारदात हुई, तो अमरीश ने फोन कर नेहा को भी बुला लिया।
बदमाशों को थी कैमरों की जानकारी
शिवमंगल के मकान के दोनों रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। हालांकि, एक कैमरा मकान के गेट तक नहीं पहुंचता है, जबकि दूसरे कैमरे का डीवीआर खराब था।
पुलिस को बदमाशों के फुटेज के लिए मोहल्ले के अन्य कैमरे देखने पड़े। इससे आशंका है कि बदमाशों को सीसीटीवी कैमरों की जानकारी पहले से थी।
बहुओं से छिपाकर रखती थी चाबी
परिवार के करीबियों ने बताया कि उमा की बड़ी बहू नेहा और छोटी बहू श्वेता से नहीं बनती थी। इस कारण वह लॉकर और अलमारी की चाबी अपने पास न रखकर कहीं छिपाकर रखती थी। श्वेता दिल्ली में ही रहती है।
दोपहर में कपड़े बदलने आया था अमरीश
अमरीश ने बताया कि मंगलवार को वह किसी काम से डाकघर गया था। इस दौरान बारिश में भीग गया था। इसके चलते वह सुबह करीब 11:30 बजे घर आया था। तब तक सब कुछ ठीक था।
किरायेदारों का कहना है कि आमतौर पर पिता-पुत्र साथ जाते थे और रात में 10 बजे साथ लौटते थे।
जल्दी दरवाजा नहीं खोलती थीं उमा
शिवमंगल का कहना है कि उमा के कमरे का दरवाजा पति और बेटे के दुकान जाने के बाद बंद ही रहता था। यदि कोई आता भी था तो पहले वह उसका नाम पूछती थीं। इसके बाद खिड़की से झांककर देखती थीं और तसल्ली होने के बाद ही लोहे का दरवाजा खोलती थीं।
जिस तरीके से उमा का शव कुर्सी पर मिला, उससे लग रहा है कि कोई परिचित दरवाजा खुलवाने के बाद उमा के साथ कुर्सी तक पहुंचा। वह दाल-रोटी खा रही थीं। उनके बैठते ही वारदात को अंजाम दिया गया।


