कानपुर। नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली मिलने के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने 125 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त कर दिए हैं। पांच कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड किया गया है और छह कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस ने दो ठेकेदारों को गिरफ्तार कर लिया है।

कानपुर में मुख्यमंत्री के सख्त तेवरों के बाद नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार करने वालों पर पुलिस कमिश्नर और नगर आयुक्त ने मंगलवार को शिकंजा कसा है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने 125 करोड़ के टेंडर निरस्त कर दिए हैं। आठ कंपनियों में से पांच की टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार पाया गया। इन पांच कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया।

इसके साथ ही छह कंपनियों पर प्राथमिकी भी दर्ज करा दी गई है। वहीं, एक कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस ने दो ठेकेदार संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार कर लिया है।

डरा-धमकाकर और जालसाजी कर ठेके बांटने के आरोपी आगरा निवासी गोविंद शर्मा की पुलिस को तलाश है। वह छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी ठेकेदारी कर चुका है। वह डरा-धमकाकर टेंडर प्रक्रिया में न शामिल होने का दबाव डालता था। उसकी लोकेशन राजस्थान में मिल रही है।

सीपी ने जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) भी गठित कर दी है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि कई दिनों से नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया में धांधली की शिकायतें मिल रही थीं। ठेकेदारों का सिंडिकेट दूसरे ठेकेदारों को डराकर-धमकाकर टेंडर प्रक्रिया में न शामिल होने का दबाव डालता था।

कुल छह एफआईआर दर्ज

आरोपी ठेकेदार फर्जी कागजों और गलत सूचनाओं के आधार पर अपनी कंपनियों का संचालन कर रहे थे। इसमें गोविंद शर्मा का नाम सामने आया है। यह 15 फीसदी कम रेट पर टेंडर डलवाता था और फिर लॉटरी सिस्टम से अपने ही लोगों को ठेका दिलवा देता था।

सीपी ने बताया कि ठेकेदारों के खिलाफ कुल छह प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इनमें पांच स्वरूपनगर थाने में नगर आयुक्त की ओर से और एक प्राथमिकी ठेकेदार सनी सिंह की ओर से फजलगंज थाने में दर्ज कराई गई है।

गैंगस्टर की होगी कार्रवाई

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि गोविंद शर्मा समेत जिन ठेकेदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उन पर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही एडीसीपी सेंट्रल अर्चना सिंह के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी गई है।

इस टीम में एसीपी स्वरूपनगर के साथ ही एसएचओ स्वरूपनगर और फजलगंज भी रहेंगे। यह टीम अब तक दिए गए ठेकों, उन्हें कैसे बांटा जाता था, किन-किन अधिकारियों की मिलीभगत है और कौन-कौन डराते-धमकाते थे, समेत अन्य बिंदुओं की जांच करेगी।

अभिलेख सही न काम की गुणवत्ता

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ठेकेदारों की कंपनियों के न तो अभिलेख सही मिले हैं और न ही उनकी ओर से कराए गए कामों की गुणवत्ता सही पाई गई है। उनकी ओर से नगर निगम को दी गई सूचनाएं भी जांच में गलत और भ्रामक पाई गई हैं।

ये कंपनियां हुईं ब्लैकलिस्टेड
मेसर्स दिलीप बाजपेई।
मेसर्स अजय इंटरप्राइजेज, मालिक अजय बाजपेई।
पारसनाथ बिल्डर, मालिक संदीप जैन।
कैलाश इंटरप्राइजेज, मालिक गोविंद शर्मा।
तिरुपति ट्रेडर्स, प्रार्थना शुक्ला, पत्नी प्रोफेसर राजेश शुक्ला।
87 करोड़ के काम कराने के बाद कंपनियां ब्लैकलिस्टेड

कैलाश इंटरप्राइजेज ने 13 करोड़ रुपये, पारसनाथ बिल्डर ने 24 करोड़ रुपये, तिरुपति ट्रेडर्स ने 30 करोड़ रुपये और जगदंबा इंटरप्राइजेज ने 20 करोड़ रुपये के काम कराए हैं।