जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों और करदाताओं को राहत, टैक्स व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम फैसले
नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों और करदाताओं के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। बैठक में जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने, रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने और टैक्स प्रशासन को अधिक पारदर्शी एवं अनुमानित बनाने के उद्देश्य से कई बदलावों को मंजूरी दी गई।
काउंसिल ने जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। साथ ही मुकदमा चलाने की मौद्रिक सीमा को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। हालांकि टैक्स चोरी, धोखाधड़ी के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल करने या गलत तरीके से रिफंड लेने जैसे गंभीर मामलों में अधिकारियों की कार्रवाई के प्रावधान लागू रहेंगे।
मौजूदा व्यवस्था के तहत एक करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी अथवा फर्जी तरीके से आईटीसी या रिफंड लेने के मामलों में जीएसटी अधिकारियों को गिरफ्तारी का अधिकार है। इसके लिए आयुक्त स्तर के अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना जरूरी है। काउंसिल के फैसलों के बाद इस व्यवस्था में भी राहत देने की दिशा में बदलाव किया गया है।
न्यूनतम सजा का प्रावधान खत्म
जीएसटी काउंसिल ने न्यूनतम सजा से जुड़े प्रावधान को भी समाप्त करने का फैसला किया है। अब प्रत्येक मामले में जुर्माना, कारावास या दोनों में से सजा का निर्धारण न्यायिक विवेक के आधार पर किया जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, जहां किसी विशेष उल्लंघन के लिए अलग से कोई जुर्माना निर्धारित नहीं है, वहां लागू होने वाले सामान्य जुर्माने को 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया है। इससे छोटे और सामान्य उल्लंघनों से जुड़े मामलों में करदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
रिफंड प्रक्रिया होगी तेज
रिफंड प्रक्रिया को भी आसान और तेज करने का फैसला लिया गया है। अब रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। इससे कारोबारियों और अन्य पात्र करदाताओं को रिफंड राशि जल्द मिलने की संभावना बढ़ेगी।
काउंसिल ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सामान की आपूर्ति करने वाले छोटे करदाताओं के लिए भी पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है।
आईटीसी दावों की होगी समीक्षा
जीएसटी काउंसिल ने इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए अधिकारियों की एक समिति गठित करने का फैसला किया है। यह समिति यह अध्ययन करेगी कि सही बिल रखने वाले, सामान प्राप्त कर चुके और आपूर्तिकर्ता को पूरा भुगतान कर चुके वास्तविक खरीदारों के हितों की किस तरह बेहतर सुरक्षा की जा सकती है।
मंत्रालय के मुताबिक समिति करीब तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद इस विषय को काउंसिल की अगली बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा।
हर साल जीएसटी दरों की समीक्षा
वित्त मंत्रालय की ओर से बताया गया कि जीएसटी दरों की समीक्षा के लिए हर साल काउंसिल की एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने नोटिस और कार्रवाई के लिए एक समान मानक अपनाने की दिशा में भी सिफारिश की है।
बैठक के बाद वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि कर्मचारियों के बीमा कवर पर नियोक्ताओं द्वारा चुकाए गए जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलने का प्रावधान किया जाएगा। सरकार के इन फैसलों को जीएसटी व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और करदाताओं के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


