घाटमपुर से नौबस्ता तक के मरीजों के रिकॉर्ड में बहादुर शाह जफर नगर दर्ज, हॉटस्पॉट की पहचान पर सवाल
कानपुर, संवाददाता।
कानपुर में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय पोर्टल पर दर्ज डेंगू मरीजों के रिकॉर्ड में शहर के अलग-अलग इलाकों के मरीजों का पता एक ही वार्ड के रूप में दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। कई मरीजों के रिकॉर्ड में उनके वास्तविक क्षेत्र की जगह बहादुर शाह जफर नगर, वार्ड नंबर-8 दर्ज है।
जानकारी के अनुसार नौबस्ता, मंधना, बर्रा-3, हनुमंत विहार नौबस्ता, कुरसवां, लक्ष्मीपुरवा, संजीव नगर, नई बस्ती गोविंद नगर, सुभाष नगर शिवराजपुर और घाटमपुर जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के मरीजों के रिकॉर्ड में बहादुर शाह जफर नगर दर्ज होने की बात सामने आई है। इससे डेंगू के वास्तविक फैलाव वाले क्षेत्रों और हॉटस्पॉट की पहचान को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सही लोकेशन से तय होती है कार्रवाई
डेंगू नियंत्रण अभियान में मरीज का सही पता और लोकेशन दर्ज होना बेहद महत्वपूर्ण होता है। स्वास्थ्य विभाग इन्हीं आंकड़ों के आधार पर प्रभावित इलाकों में सर्वे, एंटी-लार्वा अभियान, फॉगिंग और जागरूकता गतिविधियां संचालित करता है। ऐसे में यदि अलग-अलग क्षेत्रों के मरीजों को एक ही वार्ड में दर्ज किया जा रहा है तो क्षेत्रवार डेंगू की स्थिति का सही आकलन प्रभावित हो सकता है।
निजी लैब संचालकों ने भी उठाए सवाल
मामले में कुछ निजी पैथोलॉजी लैब संचालकों ने भी रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन मरीजों के रिकॉर्ड में बहादुर शाह जफर नगर दर्ज है, उनके वास्तविक क्षेत्रों में संबंधित लैब के कलेक्शन सेंटर या जांच केंद्र मौजूद नहीं हैं। इससे मरीज के वास्तविक निवास स्थान और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पते के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।
तकनीकी गलती है या डेटा फीडिंग की समस्या?
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि अलग-अलग क्षेत्रों के मरीजों का रिकॉर्ड एक ही वार्ड में कैसे पहुंचा। यदि यह तकनीकी मैपिंग अथवा डेटा फीडिंग की त्रुटि है तो इसे समय रहते दुरुस्त करना जरूरी है। गलत आंकड़ों के आधार पर डेंगू प्रभावित क्षेत्रों का चयन होने पर फॉगिंग, एंटी-लार्वा अभियान और सैनिटाइजेशन जैसी गतिविधियां वास्तविक जरूरत वाले इलाकों से अलग संचालित हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टिंग व्यवस्था में सामने आई इस विसंगति को लेकर स्पष्टता जरूरी है, ताकि डेंगू नियंत्रण अभियान सही आंकड़ों और वास्तविक क्षेत्र की स्थिति के आधार पर चलाया जा सके। अब निगाह इस बात पर है कि विभाग रिकॉर्ड में सामने आई इस गड़बड़ी की जांच कर इसे कब तक दुरुस्त करता है।

