गिरफ्तारी की शक्तियों पर नियंत्रण, छोटे मामलों में नोटिस से राहत और रिफंड प्रक्रिया में तेजी से व्यापारियों को उम्मीद

आज का चौपाल | संवाददाता, कानपुर।

दिल्ली में आयोजित 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए राहतकारी फैसलों का कानपुर के उद्यमियों और व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है। कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी व्यवस्था में प्रस्तावित सुधार लागू होने से व्यापारिक माहौल बेहतर होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और छोटे कारोबारियों को अनावश्यक नोटिस तथा कार्रवाई के डर से राहत मिल सकेगी। उनका मानना है कि इससे कर प्रशासन और व्यापारियों के बीच विश्वास मजबूत होगा।

कारोबारी संगठनों के मुताबिक, जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों को सीमित करने, छोटे मामलों में नोटिस जारी करने के नियमों में राहत देने और कर संबंधी विवादों में आपराधिक कार्रवाई का दायरा स्पष्ट करने जैसे प्रस्ताव व्यापार जगत के लिए अहम हैं। कारोबारियों का कहना है कि कर संबंधी सामान्य गलतियों और जानबूझकर की गई कर चोरी के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए, ताकि ईमानदारी से कारोबार करने वालों को बेवजह परेशान न होना पड़े।

फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल और कानपुर कपड़ा कमेटी के अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि गिरफ्तारी की शक्तियों पर नियंत्रण से विभागीय मनमानी की आशंका कम होगी। इससे व्यापारियों और उद्यमियों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी तथा वे अधिक भरोसे के साथ कारोबार कर सकेंगे।

कानपुर उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री कृपाशंकर त्रिवेदी ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने से व्यापार और राजस्व, दोनों को लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि त्योहारों का मौसम शुरू होने के साथ बाजार में सकारात्मक माहौल बनना जरूरी है। छोटे व्यापारियों को नोटिस और अनुपालन संबंधी जटिलताओं से राहत मिलने पर कारोबार को गति मिल सकती है।

प्रोविंशियल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल सेठ ने फैसलों को उद्योग और व्यापार जगत के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि कर संबंधी मामलों में प्रक्रिया सरल होने और कार्रवाई के नियम स्पष्ट होने से ईमानदार कारोबारियों का विश्वास बढ़ेगा।

भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने बिना न्यायालय की मंजूरी गिरफ्तारी की व्यवस्था को समाप्त करने संबंधी प्रस्ताव का स्वागत किया। उनके अनुसार, इससे व्यापारियों के बीच बना भय कम करने और कर प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

वहीं, कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री पंकज अरोड़ा ने छोटे व्यापारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए प्रस्तावित राहत को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सामान्य जुर्माने को 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने, पात्र रिफंड दावों के 90 प्रतिशत मामलों को तीन कार्यदिवस में स्वतः प्रोसेस करने और रिफंड आवेदन की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने जैसे प्रस्तावों का स्वागत किया। उनके मुताबिक, रिफंड प्रक्रिया में तेजी आने से कारोबारियों की पूंजी लंबे समय तक नहीं फंसेगी।

कारोबारी संगठनों ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक छोटे विक्रेताओं की आसान पहुंच को भी नए अवसरों से जोड़कर देखा। उनका कहना है कि जीएसटी पंजीकरण, इनपुट टैक्स क्रेडिट और नोटिस संबंधी प्रक्रियाएं सरल होने से व्यापार करना आसान हो सकता है।

कुल मिलाकर, कानपुर के कारोबारी इन प्रस्तावित सुधारों से राहत और पारदर्शिता की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, उनका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि फैसलों को किस रूप में और कब लागू किया जाता है।