शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 25 सितंबर को
नई दिल्ली, एजेंसी। प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। कोर्ट अब केंद्र और राज्यों के जवाब मिलने के बाद मामले में आगे सुनवाई करेगा। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
याचिका में पेपर लीक में शामिल आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति की जांच कर उसे जब्त करने के निर्देश देने की मांग की गई है। मुख्य सवाल यह है कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों की संपत्ति जब्त करने और अपराध से जुड़े आर्थिक लाभ पर कार्रवाई के लिए किस तरह की कानूनी व्यवस्था लागू की जा सकती है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मंगलवार को अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका पर केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख तय की है।
याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक करने वालों और इस तरह के अपराध में शामिल लोगों की पूरी संपत्ति का आकलन किया जाना चाहिए। इसमें उनके परिवार के सदस्यों की संपत्ति की भी जांच करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि जांच में अवैध संपत्ति या अपराध से अर्जित धन का पता चलने पर भ्रष्टाचार निवारण कानून, मनी लॉन्ड्रिंग कानून, बेनामी संपत्ति कानून और ब्लैक मनी कानून के तहत उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि पेपर लीक के अपराध में दोषी पाए जाने पर मिलने वाली सजाएं लगातार लागू हों, यानी एक के बाद एक सजा लागू की जाए, न कि सभी सजाएं एक साथ। याचिकाकर्ता के मुताबिक, इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का अध्ययन करने की मांग
याचिका में विधि आयोग से पेपर लीक से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर रिपोर्ट तैयार कराने की मांग भी की गई है। इसमें आयोग को दूसरे देशों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं का अध्ययन कर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से समयबद्ध जांच और मुकदमे की मांग को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया गया। याचिकाकर्ता ने बताया कि सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित हो चुका है और इसमें पेपर लीक के खिलाफ कानून को और कड़ा किया गया है।


