नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष में उनके साहस और दृढ़ संकल्प को याद किया। श्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि इस आंदोलन में शामिल लोगों का बलिदान और संकल्प भारतीयों की आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, “ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले सभी लोगों को याद करता हूं। उनका साहस हमेशा हर भारतीय के लिए प्रेरणा बना रहेगा।”
आंदोलन में महात्मा गांधी की भूमिका को याद करते हुए मोदी ने कहा, “महात्मा गांधी जी के नेतृत्व से प्रेरित होकर भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा का संचार किया और औपनिवेशिक शासन से मुक्त होने के लिए हमारे लोगों के अटूट संकल्प को प्रतिबिंबित किया।”
गौरतलब है कि भारत छोड़ो आंदोलन 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित होने के बाद शुरू किया गया था। इसी दौरान महात्मा गांधी ने “करो या मरो” का ऐतिहासिक नारा दिया था। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ सबसे बड़े जन-आंदोलनों में से एक था।
औपनिवेशिक अधिकारियों की कड़ी कार्रवाई के बावजूद, देशभर के लोगों ने विरोध प्रदर्शनों, हड़तालों और प्रतिरोध की गतिविधियों में हिस्सा लिया। आंदोलन शुरू होने के कुछ ही समय बाद ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी जी और कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद, छात्रों, मजदूरों, किसानों और आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी से यह आंदोलन जारी रहा।
यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम चरण की एक निर्णायक घटना बन गया और इसने ब्रिटिश शासन को समाप्त करने की बढ़ती मांग को स्पष्ट रूप से सामने रखा। दशकों तक चले राजनीतिक लामबंदी और औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष के बाद आखिरकार 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।

