35 जवानों के रिकॉर्ड की जांच में सामने आई गड़बड़ियां, तत्कालीन जिला युवा कल्याण अधिकारी और वरिष्ठ सहायक पर कार्रवाई की संस्तुति
चौपाल संवाद
कानपुर। प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों की ड्यूटी और भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। उपनिदेशक युवा कल्याण शिल्पी पांडेय की जांच में 35 पीआरडी जवानों के भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ियां मिली हैं। जांच रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 3,05,500 रुपये के भुगतान को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
जांच में तत्कालीन जिला युवा कल्याण अधिकारी आरती जायसवाल और वरिष्ठ सहायक वैभव सिंह को जिम्मेदार माना गया है। उपनिदेशक ने मामले में कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट महानिदेशक, प्रांतीय रक्षक दल एवं युवा कल्याण को भेजी है।
जांच के अनुसार, जिले में करीब 550 पीआरडी जवान तैनात हैं। शिकायत मिलने के बाद 35 जवानों की हाजिरी और भुगतान की जानकारी की जांच की गई। इस दौरान कुछ जवानों को एक दिन की ड्यूटी के बदले 15 हजार रुपये तक भुगतान किए जाने के मामले सामने आए, जबकि निर्धारित दर के अनुसार एक दिन की ड्यूटी के लिए 500 रुपये दिए जाने थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मेश कुमार की नवंबर 2025 में कल्याणपुर थाने में एक दिन की ड्यूटी दर्ज थी, लेकिन उनके खाते में 15 हजार रुपये का भुगतान किया गया। दिसंबर 2025 में अरमापुर थाने में एक दिन की ड्यूटी के बदले 15,500 रुपये दिए जाने का मामला भी सामने आया। जनवरी 2026 में उनकी ड्यूटी कर्नलगंज थाने में दर्ज थी।
इसी तरह गीता देवी को छह दिन की ड्यूटी के बदले 15,500 रुपये और प्रदीप त्रिवेदी को 3,500 रुपये के स्थान पर 15 हजार रुपये दिए जाने की बात जांच में सामने आई। राजेश कुमार की ड्यूटी डीएम आवास पर लगी थी, लेकिन विकास भवन में ड्यूटी दिखाकर 15 हजार रुपये का भुगतान किया गया। अक्टूबर 2025 में उन्हें 15 दिन की ड्यूटी के स्थान पर 31 दिन का भुगतान किए जाने और दिसंबर में 11 हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाने का भी उल्लेख है।
जांच रिपोर्ट में अमर सिंह, रवि कुमार, अरुणा सिंह और धर्मेंद्र कुमार समेत अन्य जवानों के भुगतान में भी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा खेल प्रतियोगिताओं में ड्यूटी लगाने के नाम पर 26 पीआरडी स्वयंसेवकों को कुल 99,500 रुपये भुगतान किए जाने का मामला सामने आया। जांच के दौरान इस भुगतान से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
उपनिदेशक शिल्पी पांडेय के अनुसार, शिकायत के आधार पर जांच की गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 के भुगतान से संबंधित मस्टर रोल और अन्य रिकॉर्ड मांगे गए थे, लेकिन कार्यालय में आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले। वर्तमान युवा कल्याण अधिकारी अमित सिंह से भी रिपोर्ट मांगी गई थी।
जांच में कुछ जवानों की लगातार कई महीनों तक एक ही स्थान पर ड्यूटी लगाए जाने की बात भी सामने आई, जबकि पोर्टल पर प्रतिदिन अलग-अलग ड्यूटी दर्ज करने की व्यवस्था थी। उपनिदेशक के मुताबिक, वरिष्ठ सहायक से मांगे गए रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण जांच पूरी करने में कठिनाई आई है।
शिल्पी पांडेय ने बताया कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट महानिदेशक को भेज दी गई है। तत्कालीन अधिकारी के कार्यकाल के अन्य वर्षों के रिकॉर्ड की भी शासन की अनुमति लेकर जांच कराए जाने की बात कही गई है।
