कांग्रेस अध्यक्ष ने अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ टकराव, सीमा सुरक्षा और बढ़ते व्यापार घाटे पर मांगा जवाब
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चीन नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक निर्भरता और कूटनीतिक जवाबदेही से जुड़े तीन सवाल पूछे। खरगे ने आरोप लगाया कि चीन को पहले भी कई बार क्लीन चिट दी जा चुकी है, लेकिन अब प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई स्पष्ट करनी चाहिए।
खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ हुए टकराव का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक की टिप्पणियों का हवाला देते हुए सीमा पर लगातार हो रही घटनाओं को चिंताजनक बताया। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि डोकलाम और गलवान घाटी की घटनाओं के बाद क्या सीमा पर एक और गंभीर टकराव की स्थिति बन रही है?
उन्होंने अगस्त में तवांग के पास चीनी घुसपैठ की खबरों का भी जिक्र किया। खरगे के अनुसार, वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट वाचा-देमाई क्षेत्र में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी टकराव जारी रहने की खबरें सामने आईं। उन्होंने पूछा कि क्या भारतीय सैनिकों की गश्त करने की क्षमता प्रभावित हुई है और सरकार इन घटनाओं पर देश को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दे रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में सीमा से जुड़ी घटनाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से सीमा पर गश्त के अधिकारों और चीन के साथ कूटनीतिक वार्ताओं के ठोस परिणामों को लेकर जवाब मांगा।
खरगे ने चीन के साथ बढ़ते आयात और व्यापार घाटे पर भी चिंता जताई। उन्होंने 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी सामने आनी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से सीमा सुरक्षा, चीन के साथ व्यापारिक संबंधों और कूटनीतिक प्रयासों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उनके बयान से चीन नीति को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने के संकेत हैं।

