कानपुर। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर शनिवार को सात मिनट में भी 500 लीटर पानी नहीं निकल पाया। लखनऊ से पहुंचे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपांकर ने जब ड्रेनेज सिस्टम को परखा तो यह सच्चाई सामने आई। इसके बाद दीपांकर ने मरम्मत कार्य की गुणवत्ता भी जांची। काम संतोषजनक नहीं मिलने पर निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के जिम्मेदारों से भी नाराजगी जताई।

ड्रेनेज सिस्टम की जांच में खुली पोल

आलोक दीपांकर एक्सप्रेसवे के किमी संख्या 32.4 (सहरावां गांव) के पास पहुंचे। यहां उन्होंने सोख्ता तकनीक से बनी सड़क पटरी में चार वर्ग फीट का गड्ढा खुदवाकर टैंकर से पानी डलवाया और उसके दूसरी तरफ से सड़क के बाहर निकलने का इंतजार करने लगे। करीब सात मिनट इंतजार के बाद भी पानी एक्सप्रेसवे से बाहर नहीं निकला। इस पर उन्होंने एक कर्मचारी को वहीं रुककर पानी के बाहर निकलने में लगने वाला समय नोट करने के लिए कहा।

इसके बाद उन्होंने किमी संख्या 30.6 (बेगमखेड़ा गांव) के पास सड़क खोदकर कराई जा रही मरम्मत का काम देखा। निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई है या नहीं और गुणवत्ता जांचने के लिए जेसीबी से एक फीट गहरा गड्ढा खुदवाया गया। डामर-गिट्टी (बिटुमिन) की मोटाई, नीचे डाले गए बोल्डर और कंक्रीट की मोटाई की भी जांच की गई।

500 लीटर पानी सड़क पर डलवाया

इसके बाद आलोक दीपांकर फिर उस स्थान पर पहुंचे, जहां गड्ढे में पानी भरवाया गया था। पानी सड़क से बाहर न निकलने पर 500 लीटर के टैंकर का पूरा पानी सड़क पर गिरवा दिया गया। काफी मात्रा में पानी सड़क पर रुक गया।

दीपांकर ने कहा कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई है। निर्माण एजेंसी के कार्य की निगरानी की गई होती तो ऐसी स्थिति नहीं आती।

ग्रीन फील्ड एरिया में सुधार की जरूरत

आलोक दीपांकर ने एनएचएआई और पीएनसी के अधिकारियों के साथ बैठक भी की। बैठक में एक्सप्रेसवे की जांच के लिए अधिकृत किए गए आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर कुमार सुधार रेड्डी, एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल, पीडी नवरत्न और पीएनसी के अधिकारी शामिल रहे।

सूत्रों के अनुसार, टीम ने 45 किमी लंबे ग्रीन फील्ड एरिया में बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता बताई। तकनीकी जांच की रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर सुधार कराने के निर्देश दिए गए हैं।