जबलपुर, एजेंसी। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 3,073 हेक्टेयर जमीन पर रक्षा निर्माण की क्षमता और 16,960 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश राज्य की महत्वाकांक्षी सोच को दर्शाते हैं। ये प्रयास मध्य प्रदेश को देश का बड़ा रक्षा और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने गुरुवार को जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में टी-72 और टी-90 टैंकों के ओवरहॉल (मरम्मत और नवीनीकरण) के लिए 472 करोड़ रुपये की लागत से तैयार सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे भारत की रक्षा निर्माण क्षमताओं और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्री राकेश सिंह भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह दिन भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक नया मील का पत्थर है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
रक्षा मंत्री ने कहा कि 472 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट स्थानीय प्रतिभाओं और तकनीकी वर्कफोर्स के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में हुनर की कोई कमी नहीं है, उन्हें सिर्फ अवसर, तकनीक और सही इकोसिस्टम की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना उन सैनिकों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो दुश्मन का मुकाबला करने के लिए इन टैंकों का इस्तेमाल करते हैं। टैंकों के ओवरहॉल और आधुनिकीकरण से उनकी परिचालन क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
जबलपुर को बड़ा रक्षा हब बनाने का लक्ष्य
जबलपुर की पहचान डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और सैन्य संस्थानों के बड़े केंद्र के रूप में बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि अब इस पहचान को नए स्तर पर ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य जबलपुर को डिफेंस टेक्नोलॉजी, मेंटेनेंस, आधुनिकीकरण और मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनाना है। इससे क्षेत्र में रक्षा उद्योग के साथ-साथ रोजगार और तकनीकी विकास को भी गति मिलेगी।
46 हजार करोड़ से बढ़कर 1.77 लाख करोड़ हुआ रक्षा उत्पादन
आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र अब आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46,000 करोड़ रुपये था। आज यह बढ़कर 1.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि देश की रक्षा निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति को दर्शाती है।


