पार्टी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए, पूरी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की मांग

नई दिल्ली। एजेंसी।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की कथित चोरी का मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ तीसरी बार भी आरोप तय नहीं हो सके हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि मंदिर ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने के बजाय गवाह क्यों बनाया गया।

कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए भाजपा से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जांच केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और कथित अनियमितताओं में जिन लोगों की भूमिका सामने आए, उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि जब मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कार्यों का श्रेय लेने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे रहते हैं, तो चंदे की कथित चोरी के मामले में जवाबदेही तय करने की बात आने पर चुप्पी क्यों है।

पार्टी का दावा है कि आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया, जबकि मंदिर की पूरी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और ऑडियो उपलब्ध कराने की मांग अब तक लंबित है। कांग्रेस का कहना है कि पूरी रिकॉर्डिंग सामने आने से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं।

कांग्रेस ने मांग की है कि कथित चोरी के मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

हालांकि, ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। मामले में आरोपों की वास्तविक स्थिति, जांच की प्रगति और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है।