चुनाव में निष्पक्षता, जवाबदेह सरकार और पारदर्शी व्यवस्था को लोकतंत्र के लिए बताया जरूरी

आज का चौपाल | संवाददाता

नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने नई शिक्षा नीति को लेकर कहा कि इसे लागू हुए अभी पर्याप्त समय नहीं हुआ है। ऐसे में इसके परिणामों पर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति की प्रक्रिया अभी जारी है और इसके वास्तविक परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट होंगे।

नई शिक्षा नीति पर अपनी बात रखते हुए जोशी ने कहा कि फिलहाल यह शुरुआत का दौर है। नीति को लागू हुए ज्यादा समय नहीं बीता है, इसलिए इसके प्रभाव और परिणामों का आकलन करने के लिए कुछ और समय देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभी इसके नतीजों को लेकर कोई अंतिम टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शन को लेकर भी मुरली मनोहर जोशी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव, जवाबदेह सरकार और पारदर्शी नौकरशाही की महत्वपूर्ण भूमिका है।

जोशी ने लोकतंत्र की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा होनी चाहिए। उन्होंने अब्राहम लिंकन के लोकतंत्र संबंधी विचार का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी मजबूत रह सकती है, जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकारें जवाबदेह हों और प्रशासन में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही विपक्ष को भी जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह संविधान के दायरे में चलनी चाहिए। यदि संविधान का उल्लंघन होता है तो ऐसे मामलों को न्यायपालिका के समक्ष रखा जाना चाहिए। जोशी ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास स्पष्ट वैकल्पिक कार्यक्रम होना चाहिए, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में सकारात्मक बहस आगे बढ़ सके।

एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोप

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध पिछले कुछ दिनों में तेज हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

मुरली मनोहर जोशी ने निष्पक्ष चुनाव और पारदर्शी व्यवस्था को लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताते हुए सभी पक्षों से संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी भूमिका निभाने की बात कही।