कानपुर, संवाददाता। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जेल में बंद बेटे सुब्रत से कारोबार संचालन के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी पंजीकृत कराने की अनुमति मांगते हुए पत्नी पुनिता ने सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान पुनिता अपने अधिवक्ता के साथ अदालत पहुंचीं और कारोबार चलाने में आ रही परेशानियों का हवाला दिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
कल्याणपुर के इंदिरा नगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में पांच सितंबर को दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने पहले विनीत की बहू शालू, पुराने नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को जेल भेजा था। बाद में पुलिस रिमांड के दौरान विशाल ने कथित तौर पर सुब्रत के कहने पर हत्या करने की बात कही थी। इसके बाद पुलिस ने अदालत में अर्जी देकर शालू को जेल से रिहा कराया और सुब्रत को जेल भेज दिया।
पति की मौत और बेटे के जेल जाने के बाद पुनिता ने करोड़ों रुपये के कारोबार की जिम्मेदारी संभाली है। हालांकि, कारोबार चलाने में कई तरह की परेशानियां आ रही हैं। पुनिता की ओर से अधिवक्ता पीयूष शुक्ला ने अदालत में अर्जी देकर पावर ऑफ अटॉर्नी पंजीकृत कराने की अनुमति मांगी है।
अर्जी के अनुसार, दवा कंपनियों से होने वाली रकम बैंक खाते में जमा तो हो रही है, लेकिन उसे निकालने में दिक्कत आ रही है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि रुपये निकालने के लिए चेक पर पुनिता और सुब्रत दोनों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। सुब्रत के जेल में होने के कारण बार-बार हस्ताक्षर कराने में परेशानी हो रही है।
त्योहारों का समय होने के कारण कर्मचारियों को वेतन देने में भी कठिनाई आ रही है। इसके अलावा दवा कंपनियों को भुगतान करने और लाइसेंस संबंधी कार्यों में भी बाधाएं आने की आशंका जताई गई है। अदालत के आदेश के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
