गोरखपुर, एजेंसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में 23 जुलाई से चल रही श्रीराम कथा के विश्राम सत्र और गुरु पूर्णिमा महोत्सव को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सनातन की पावन धारा में हर मत और संप्रदाय को संरक्षण मिलता है, लेकिन कुछ विषधर इसमें आकर इसे डसने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपरा पर आघात कर भारत को अस्थिर करने वाले प्रयासों के खिलाफ सभी को जागरूक रहना होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे देश की प्रगति यात्रा में बाधा उत्पन्न करने वालों से सावधान और सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ हो रही साजिशों को समझना होगा। कुछ ताकतें भारत की प्रगति, सनातन संस्कृति और परंपरा को नुकसान पहुंचाना चाहती हैं। यदि अपने ही समाज में कालनेमि का रूप धारण कर बैठे राष्ट्रविरोधी षड्यंत्रकारियों को नहीं पहचानेंगे, तो यह अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसी स्थिति होगी।

मुख्यमंत्री ने गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित करने तथा व्यासपीठ का पूजन करने के बाद कहा कि समाज के कुछ लोग उन ताकतों के प्रवक्ता बने हुए हैं, जो सनातन संस्कृति पर आघात करने में लगी हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति और समाज ऐसी शक्तियों तथा उनके समर्थकों से सतर्क रहकर स्वयं को सुरक्षित रखेगा, उसका परिवार और समाज अधिक सुखी रहेगा। समाज सुखी रहेगा तो राष्ट्र को समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने तेज गति से प्रगति की है और अगले दो-तीन वर्षों में दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिन देशों को भारत ने विकास की दौड़ में पीछे छोड़ा है, उनके लिए यह स्वाभाविक रूप से स्वीकार करना आसान नहीं है। कई ताकतों को भारत की प्रगति रास नहीं आ रही है और उन्होंने देश में अस्थिरता, अशांति और अव्यवस्था फैलाने की योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 12 वर्ष पहले देश के 120 जिलों में नक्सलवाद का प्रभाव था, जबकि आज एक भी जिला नक्सलवाद से प्रभावित नहीं है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को बढ़ावा देने वाले लोग अब दूसरे रूप और नए नामों से सामने आएंगे। रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कालनेमि ने हनुमान जी का मार्ग रोकने का प्रयास किया था, उसी प्रकार वर्तमान समय के ‘कालनेमियों’ से भी सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भारत के खिलाफ षड्यंत्रों में शामिल हैं।