लखनऊ, संवाददाता। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए योगी सरकार महिलाओं को साधने के लिए ‘बिहार मॉडल’ पर ₹50,000 की वित्तीय सहायता योजना पर विचार कर रही है। इसका लक्ष्य महिला वोट बैंक को सुरक्षित करना और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। इस ‘मेगा प्लान’ के तहत चुनाव से पहले ₹20,000 की पहली किस्त देने का प्रस्ताव है।
हालांकि, अखिलेश यादव ने इसे महज चुनावी जुमला और भाजपा की ‘पाप की कमाई’ बताते हुए राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिससे उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है।
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव हैं। भाजपा सरकार विधानसभा चुनावों से पहले महिलाओं के वोट बैंक को पक्का करने के लिए एक बड़ी योजना लागू कर सकती है। इसके तहत महिलाओं को ₹50,000 की आर्थिक मदद दी जाएगी। चुनाव से पहले ₹20,000 की पहली किस्त दी जाएगी। चुनाव के बाद, अगर भाजपा की सरकार बनती है, तो ₹10,000-₹10,000 की तीन किस्तें दी जाएंगी।
सरकार में इस योजना पर बातचीत शुरू हो गई है। योगी सरकार ने विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। जमीनी मूवमेंट के बीच सरकार महिलाओं के वोट बैंक को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ी योजना पर विचार कर रही है। महिलाओं की मदद, स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए एक योजना पर विचार किया जा रहा है। जो योजना तैयार की जा रही है, उसमें सीधी मदद के साथ-साथ स्वरोजगार और आर्थिक आजादी के लिए भी सहयोग शामिल है। उम्मीद है कि इसे महिला कल्याण विभाग के जरिए लागू किया जाएगा।
रिपोर्ट्स में उत्तर प्रदेश की प्रस्तावित योजना की तुलना दूसरे राज्यों में लागू महिलाओं पर केंद्रित आर्थिक सहायता योजनाओं से की गई है। बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में चुनाव के समय महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजनाएं शुरू की गई थीं। यूपी के प्रस्तावित प्रस्ताव पर भी इसी तरह चर्चा हो रही है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश के लिए योजना का सटीक स्वरूप, पात्रता के नियम, भुगतान का शेड्यूल और इसे लागू करने का तरीका क्या होगा, इस पर अभी सरकार का आधिकारिक फैसला आना बाकी है। इसको लेकर सियासत तेज हो गई है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि भाजपा के पास चुनाव जीतने के लिए पैसे के सिवा कुछ नहीं बचा है। वह भी भाजपा की पाप की कमाई है, जिसे यूपी की धार्मिक महिलाएं कभी नहीं लेंगी।
उन्होंने कहा कि यूपी की जागरूक महिलाएं पूछ रही हैं कि जिन दूसरे राज्यों में महिलाओं को पैसे देने की घोषणा करके चुनाव जीता गया, वहां एक तरफ तो देने से आनाकानी कर रहे हैं, दूसरी तरफ पैसे वापस मांग रहे हैं और जो लौटा नहीं पा रही हैं, उन महिलाओं पर भाजपा थाने-कचहरी, पुलिस-मुकदमे की निंदनीय कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने कहा कि देखा जाए तो आज जिस ₹50,000 सालाना देने की बात भाजपा सरकार कर रही है, वह पैसे पिछले 10 साल में भी दे सकती थी, लेकिन दिया नहीं। मुख्यमंत्री जी ने यूपी की महिलाओं के हक-अधिकार के हजारों करोड़ रुपये अपने प्रचार पर खर्च करके सबको ठेंगा दिखा दिया।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि ₹50,000 हर साल के हिसाब से भाजपा की भ्रष्ट सरकार ने पिछले 10 साल में महिलाओं के हिस्से के ₹5 लाख खा लिए और अब केवल ₹20,000 देने का जुमला परोस रही है। ₹20,000 तो ₹5 लाख का केवल 4% हुआ। इसका मतलब यह है कि भाजपा ने महिलाओं के हक का 96% डकार लिया।
