कानपुर। हनुमंत विहार क्षेत्र में एक गेस्ट हाउस के अंदर नौकरी दिलाने के नाम पर 100 करोड़ रुपये की ठगी का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने छापेमारी कर वहां ट्रेनिंग ले रहे झारखंड, बिहार और मध्य प्रदेश के 200 से अधिक बेरोजगार युवाओं को पकड़ा, जिन्हें चेन सिस्टम और ठगी का प्रशिक्षण दिया जा रहा था।
कानपुर के हनुमंत विहार पुलिस ने बताया कि पिछले कई दिनों से गल्ला मंडी के पास अर्रा रोड स्थित एक गेस्ट हाउस में ठगी की पाठशाला चल रही थी। झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार से करीब 200 से 250 बेरोजगार युवाओं को बुलाकर उन्हें चेन बनाकर लोगों को जोड़ने और उनसे रुपये वसूलने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था।
सोमवार को जब एडीसीपी साउथ गेस्ट हाउस पहुंचे तो वहां ट्रेनिंग चलती मिली। एडीसीपी काफी देर तक युवाओं को समझाते रहे कि नौकरी के नाम पर उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है, लेकिन युवाओं ने उनकी बात नहीं मानी। बाद में जब ठगी के सबूत दिखाए गए, तब उन्हें पुलिस की बात पर भरोसा हुआ। इसके बाद मौजूद सभी युवाओं के बयान दर्ज किए गए।
तीन युवाओं की शिकायत से हुआ खुलासा
एडीसीपी साउथ ने बताया कि दो दिन पहले बिहार के तीन बेहद गरीब युवक उनके पास पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि वे तीन महीने से कंपनी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन वेतन और कमीशन के नाम पर उन्हें एक भी पैसा नहीं मिला। हालात यह हैं कि उनके पास पेट भरने और घर लौटने तक के पैसे नहीं बचे हैं।
उन्होंने पुलिस को पूरा चेन सिस्टम बताया, जिसके बाद गेस्ट हाउस में दबिश दी गई। एडीसीपी ने बताया कि पकड़े गए ठगों की कार्यशैली पर आधारित एक वेब सीरीज ‘पिरामिड स्कैम’ भी कुछ दिन पहले रिलीज हुई थी।
लग्जरी जिंदगी के सपने दिखाकर फंसाते थे
हनुमंत विहार थाना प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि चेन में जुड़ने वाले नए युवाओं को लग्जरी जिंदगी के सपने दिखाए जाते थे। गिरोह के लोग हर सेंटर पर चार-पांच लग्जरी कारें रखते थे और नए युवाओं से कहते थे कि ये कारें उन्हीं लोगों की हैं, जो कभी उनकी तरह गरीब थे।
गिरोह ने कंपनी में प्रमोशन के लिए 16 पद बनाए थे। इन पदों के लिए वेतन और कमीशन मिलाकर 25 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक की कमाई का लालच दिया जाता था। प्रमोशन के इन पदों को सिल्वर, गोल्ड, प्लेटिनम आदि नाम दिए गए थे।
फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग से करोड़ों की ठगी
फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (चेन सिस्टम) और पिरामिड नेटवर्क बनाकर बेरोजगार युवाओं से नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। दक्षिण क्षेत्र की साइबर टीम, क्राइम ब्रांच और हनुमंत विहार थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, पकड़े गए लोगों ने सिर्फ कानपुर में ही करीब 2000 युवाओं से ठगी की है। पूरे नेटवर्क में 60 हजार से अधिक युवा ठगी का शिकार हुए हैं। गिरोह ने 80 से 100 करोड़ रुपये तक की ठगी की है। इसके सबसे अधिक शिकार झारखंड, बिहार और मध्य प्रदेश के युवा हुए हैं।
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि पूरे गिरोह की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। इसका प्रभारी एडीसीपी दक्षिण सुमित सुधाकर रामटेक को बनाया गया है।
चैट के अलावा ऑडियो-वीडियो भी मिले
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, कॉरपोरेट दस्तावेज और चैट के अलावा ऑडियो-वीडियो भी मिले हैं, जिनसे उनके काम करने के तरीके का खुलासा हुआ है।
गिरफ्तार आरोपियों में रवींद्र यादव (बेगूसराय, बिहार), कमलेश कुमार (पटना, बिहार), रोहित साव (कोलकाता, पश्चिम बंगाल), मंगल शाक्य (दतिया, मध्य प्रदेश), राजू कुमार (भरहे चौरा थाना, बटना, देवरिया) और मंतोष पासवान (शाहपुर, भोजपुर, बिहार) शामिल हैं।
ऐसे बनाते थे ठगी का शिकार
गिरोह के सदस्य विन मेकर आयुर्वेदा प्राइवेट लिमिटेड और धनवंतरी आयुर्वेदा नाम की मल्टी-लेवल मार्केटिंग फ्रेंचाइजी लेकर युवाओं को हर महीने 25 से 30 हजार रुपये की नौकरी का लालच देते थे। इसके लिए पहले कॉरपोरेट स्टाइल में ऑफिस बनाकर युवाओं को बुलाया जाता था।
इंटरव्यू के बाद उनसे फीस और रजिस्ट्रेशन के नाम पर 15 से 30 हजार रुपये वसूले जाते थे। बदले में उन्हें एक से दो हजार रुपये कीमत की किट दी जाती थी, जिसमें साबुन, तेल, कपड़े और कुछ दवाएं होती थीं।
युवाओं से कहा जाता था कि वे अपने जैसे अन्य लोगों को नेटवर्क से जोड़ें, जिससे उनका कमीशन बढ़ेगा। प्रत्येक युवक पर कम से कम दो लोगों को जोड़ने का दबाव बनाया जाता था। ऐसा न करने पर सैलरी नहीं देने और रिफंड वापस न करने की धमकी दी जाती थी।
एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेक ने बताया कि अलग-अलग राज्यों में गिरोह के 100 से अधिक ट्रेनिंग सेंटर संचालित हैं। इनमें पांच सेंटर उत्तर प्रदेश में हैं। दो प्रमुख सेंटरों में एक नोएडा और दूसरा दिल्ली के लक्ष्मी नगर में संचालित है। ये सेंटर वर्ष 2021 से चल रहे थे।
गिरोह के सीएमडी इमामुल हक और विजय कुशवाहा बताए जा रहे हैं। उनका तीसरा साथी मनीष सिन्हा पहले जेल जा चुका है। पुलिस जल्द ही सरगना समेत पूरे गिरोह को पकड़ने का प्रयास कर रही है।
