नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर उद्योग को संभावित साइबर हमलों और अन्य खतरों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका को कुछ स्थापित कारोबारी हित चुनौती के रूप में देख सकते हैं।
एक साक्षात्कार में वैष्णव ने कहा कि भारत अब चिप डिजाइन और निर्माण की क्षमता रखने वाले देश के रूप में तेजी से उभर रहा है। ऐसे में उद्योग को संभावित भू-राजनीतिक जोखिमों पर लगातार नजर रखनी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत को दूसरे देशों और कंपनियों से आने वाली संभावित चुनौतियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उद्योग को साइबर हमलों के साथ-साथ किसी भी अन्य तरह के खतरे और आपूर्ति श्रृंखला में पैदा होने वाली बाधाओं के लिए तैयार रहना होगा।
मंत्री के मुताबिक, कई देश भारत को भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहे हैं और यहां अपने उत्पादों का विकास एवं निर्माण करना चाहते हैं। ऐसे में भारत के लिए अपनी सेमीकंडक्टर क्षमता को मजबूत करने के साथ सुरक्षा जोखिमों को लेकर भी सतर्क रहना जरूरी है।
1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान
सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में चिप असेंबली और परीक्षण से आगे बढ़कर चिप डिजाइन, उपकरण, सामग्री और विनिर्माण संयंत्रों तक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर जोर दे रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई में सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी थी, जिसके तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया गया है।
इस योजना के तहत चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री, विनिर्माण संयंत्र, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास को समर्थन दिया जाएगा।
पहले चरण में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी सहित पांच परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
सरकार का लक्ष्य भारत में केवल चिप पैकेजिंग तक सीमित रहने के बजाय एक व्यापक घरेलू सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है। साथ ही वैश्विक कंपनियों को भारत में सेमीकंडक्टर तकनीक के निर्माण और विकास के लिए आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार के अनुसार, सेमीकंडक्टर योजना के दूसरे चरण के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं। हाल में हुए सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम में भी निवेशकों की रुचि देखने को मिली, जहां भारत की बढ़ती चिप निर्माण क्षमता को प्रदर्शित किया गया।


