कानपुर।
बिल्हौर तहसील के उप निबंधक कार्यालय में आयकर विभाग ने सात घंटे तक गहन सर्वे कर करोड़ों रुपये की विसंगतियां पकड़ी हैं। जांच में 900 पैन नंबरों में त्रुटियां सामने आई हैं, जिसके बाद विभाग ने पांच वर्षों के महत्वपूर्ण दस्तावेज तलब किए हैं।
कानपुर में बिल्हौर तहसील परिसर स्थित उप निबंधक कार्यालय में मंगलवार को आयकर विभाग की टीम ने सर्वे किया। करीब सात घंटे तक चली जांच में अधिकारियों को करोड़ों रुपये की विसंगतियों के साक्ष्य मिले हैं। टीम ने 900 पैन नंबरों में गड़बड़ी पकड़ी है। देर शाम छह बजे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और 10 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति खरीद-बिक्री करने वाले क्रेताओं-विक्रेताओं का विवरण लेकर टीम लौट गई।
अधिकारियों ने पांच साल के दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। संबंधित रिकॉर्ड देने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। आयकर निदेशक (आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण) कानपुर तरुण कुशवाहा और संयुक्त आयकर निदेशक एके लाल के निर्देशन में सहायक आयकर आयुक्त एके वर्मा समेत अधिकारियों की टीम तीन गाड़ियों से सुबह करीब 11 बजे कार्यालय पहुंची।
वित्तीय लेन-देन के विवरण में कई खामियां
उस समय उप निबंधक मोईरशाद मौजूद नहीं थे। कर्मचारियों से पूछताछ कर रिकॉर्ड तलब किए गए। अधिकारियों ने वर्ष 2020 से 2025 तक हुई उन रजिस्ट्रियों का ब्योरा मांगा, जिनका मूल्य 10 लाख रुपये से अधिक था।
जांच में पता चला कि कार्यालय से विभाग को भेजे जा रहे वित्तीय लेन-देन के विवरण (एसएफटी) में कई खामियां हैं। करीब 900 पैन नंबरों में नाम अधूरे, पते गलत और अन्य जानकारियां त्रुटिपूर्ण मिलीं। इससे कई बड़े लेन-देन विभाग की निगरानी से बाहर रहने की आशंका जताई गई है।
टीम ने फॉर्म-61 में भी गड़बड़ी पकड़ी है। सर्वे के दौरान कार्यालय का गेट बंद कर जांच की गई। कर्मचारियों के मोबाइल भी कुछ समय के लिए कब्जे में लिए गए और कामकाज रोककर अभिलेखों की पड़ताल की गई।
इस मौके पर मुकेश कुमार, कुलदीप गुप्ता, देव अनंत श्रीवास्तव, क्यूम अहमद, अंकित श्रीवास्तव सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा।

