दिवाली से पहले सुनवाई में कोर्ट ने कहा- धार्मिक भावनाओं, स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी; 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति भी नहीं
नई दिल्ली, एजेंसी।
दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरे देश में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक भावनाओं, लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन कायम करना जरूरी है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि पटाखे जलाने की अनुमति पूरे 24 घंटे नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पटाखों के इस्तेमाल के लिए एक निश्चित समय तय किया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने संकेत दिया कि पटाखों के प्रकार और उनके इस्तेमाल की अवधि को ध्यान में रखते हुए आगे दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं।
बेरियम की जांच और उत्सर्जन स्तर पर मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बेरियम की जांच और स्वीकार्य उत्सर्जन स्तर से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अदालत ने संयुक्त फायर टेस्टिंग के लिए भी समय निर्धारित किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि बेरियम आधारित पटाखों की आउटडोर टेस्टिंग अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने इसके लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से यह भी बताया गया कि कुछ शर्तों के साथ जॉइंट पटाखों के निर्माण की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
‘जॉइंट पटाखे’ क्या होते हैं?
अदालत ने जब जॉइंट पटाखों के बारे में सवाल किया तो बताया गया कि ये लड़ी जैसे पटाखे होते हैं। ऐसे पटाखों में कई छोटे पटाखों को एक-दूसरे से जोड़कर लंबी श्रृंखला तैयार की जाती है। आम बोलचाल में इन्हें पटाखों की माला, लड़ी या चटाई पटाखा भी कहा जाता है।
इन पटाखों के इस्तेमाल को लेकर भी अदालत ने प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को ध्यान में रखने की जरूरत बताई।
फसल और प्रदूषण का मुद्दा भी उठा
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि दिवाली के दौरान पटाखों के कारण फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है और कुछ दिनों में पर्यावरण पर इसका प्रभाव काफी बढ़ जाता है।
इस पर अदालत ने कहा कि उसका उद्देश्य न तो पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाना है और न ही लोगों को चौबीसों घंटे पटाखे चलाने की अनुमति देना। पीठ ने कहा कि ऐसा समाधान तलाशना होगा जिसमें लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी हो और बुजुर्गों, बीमार लोगों तथा बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव को भी कम किया जा सके।
कोर्ट के रुख से संकेत है कि इस मामले में आगे पटाखों के इस्तेमाल के लिए समय-सीमा और पटाखों के प्रकार से संबंधित नियमों पर विचार किया जाएगा। अंतिम दिशा-निर्देश अगली सुनवाई और संबंधित तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर तय होने की उम्मीद है।

