मुंबई, एजेंसी।
महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण बने सूखे के हालात के बीच राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बैंकों को निर्देश दिया है कि मौजूदा सूखे की स्थिति को देखते हुए किसानों से फसल ऋण की वसूली के लिए उनके घर जाकर दबाव न बनाया जाए। सरकार अब इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से भी दिशा-निर्देश जारी कराने की संभावनाएं तलाश रही है।
राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को सूखा राहत कैबिनेट उपसमिति की बैठक हुई। इसमें राज्य में सूखे की स्थिति, किसानों की समस्याओं और पेयजल व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान बावनकुले ने संबंधित अधिकारियों को बैंकों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि सूखे से प्रभावित किसानों पर ऋण वसूली का अतिरिक्त दबाव न पड़े।
सरकार यह भी पता लगा रही है कि आरबीआई की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था या सर्कुलर जारी कराया जा सकता है या नहीं, जिससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के खिलाफ तत्काल ऋण वसूली की कार्रवाई को रोका जा सके। सरकार का जोर फिलहाल किसानों को राहत देने और उन्हें आर्थिक दबाव से बचाने पर है।
शहरों में पानी की कटौती का फैसला
सूखा राहत संबंधी बैठक में शहरी क्षेत्रों में पानी की खपत कम करने के लिए 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू करने का निर्देश भी दिया गया। बचाए गए पानी को अगले वर्ष जून तक सुरक्षित रखने की योजना पर भी चर्चा हुई, ताकि गर्मी के दौरान पेयजल संकट को नियंत्रित किया जा सके।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य के कई हिस्सों में अभी भी टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। वर्तमान में करीब 560 टैंकरों से विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। समिति के सदस्यों ने अगले मानसून तक लगभग 10 महीनों की पेयजल जरूरत को ध्यान में रखते हुए पहले से ठोस योजना तैयार करने पर जोर दिया।
358 में से 265 तालुके सूखाग्रस्त
सरकार के अनुसार, कम बारिश के कारण महाराष्ट्र के 358 तालुकों में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। यह राज्य के करीब 74 प्रतिशत हिस्से के बराबर है। इन क्षेत्रों के लिए सरकार ने विभिन्न राहत उपायों की घोषणा की है।
राहत पैकेज में किसानों के फसल ऋण के पुनर्गठन, भूमि राजस्व में छूट और बिजली बिल पर सब्सिडी जैसे प्रावधान शामिल हैं। सरकार का कहना है कि सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाना प्राथमिकता है।
बैठक में अधिकारियों को पेयजल उपलब्धता, टैंकर आपूर्ति और किसानों से संबंधित राहत योजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि संकटग्रस्त क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार समय पर सहायता पहुंचाई जा सके।


