रक्षा मंत्री ने पिछली सरकारों पर साधा निशाना, कहा- औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलना जरूरी
कोच्चि, एजेंसी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को वर्ष 1947 में राजनीतिक आजादी तो मिल गई, लेकिन सांस्कृतिक और सभ्यतागत पुनर्जागरण अधूरा रह गया। उन्होंने कहा कि देश के विकास का मतलब केवल आर्थिक प्रगति नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मजबूत करना और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलना भी जरूरी है।
कोच्चि में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘रामायण-वन एपिक, मैनी स्टोरीज: राम कथा अक्रॉस भारत एंड बियॉन्ड’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश का आधुनिकीकरण अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान के साथ होना चाहिए।
तुष्टीकरण की राजनीति का लगाया आरोप
राजनाथ सिंह ने राम मंदिर निर्माण में हुई देरी का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि आजादी के बाद भी भगवान राम के मंदिर के निर्माण में सात दशक क्यों लगे। उन्होंने इसका कारण अपने अनुसार “तुष्टीकरण की राजनीति” और भारत पर थोपी गई धर्मनिरपेक्षता की एक विकृत अवधारणा को बताया। यह उनका राजनीतिक आकलन है।
उन्होंने कहा कि ‘सर्व धर्म समभाव’, यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान, भारतीय सभ्यता की मूल भावना रही है। उनके अनुसार पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के प्रभाव में धर्म को सांप्रदायिकता, परंपरा को पिछड़ेपन, विश्वास को कट्टरता और आस्था को अंधविश्वास के रूप में प्रस्तुत किया गया।
युवाओं से सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का आह्वान
रक्षा मंत्री ने युवाओं से भारत के इतिहास, संस्कृति और विरासत के बारे में जागरूक होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक समझ बढ़ने से राष्ट्रीय चेतना मजबूत होगी और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा।
उन्होंने युवाओं से देश के आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी विकास में योगदान देने की अपील की। सिंह ने कहा कि आत्मविश्वासी, सक्षम और सामाजिक रूप से समावेशी भारत विकसित राष्ट्र के रूप में उभर सकता है और दुनिया के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत के वैश्विक नेतृत्व का किया उल्लेख
राजनाथ सिंह ने भारत की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अब सभ्यतागत नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस जैसी पहलों में भारत की भूमिका का जिक्र किया।
उन्होंने सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और गरीबी कम करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। सिंह ने कहा कि भारत अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत को आर्थिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान और सभ्यतागत विरासत को भी मजबूत करना होगा। युवाओं की भागीदारी से देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को गति मिल सकती है।
