कानपुर। सिंघानिया परिवार की संपत्ति हड़पने के मामले में पुलिस कमिश्नर कार्यालय में पूछताछ के दौरान पीड़ित प्रणव प्रताप सिंघानिया ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उन्हें नशे की लत में रखकर 100 से अधिक कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए थे। पुलिस को आशंका है कि आरोपी इन कागजों का इस्तेमाल अदालत में यह साबित करने के लिए कर सकते हैं कि प्राथमिकी पुलिस के दबाव में दर्ज कराई गई थी।

बुधवार को पूछताछ के लिए पुलिस कमिश्नर कार्यालय लाए गए प्रणव प्रताप ने बताया कि आरोपियों ने होटल में नशे की हालत में उनसे कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए। यह जानकारी सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस को आशंका है कि इन कागजों में से किसी का इस्तेमाल आरोपियों द्वारा अदालत में पुलिस के खिलाफ किया जा सकता है।

प्रणव प्रताप ने 24 अक्टूबर को बिल्डर सुयश अस्थाना, उनके पिता अनूप अस्थाना, बृजेंद्रनाथ मिश्रा और मेडिकल स्टोर संचालक श्रीराम उर्फ रचित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन लोगों ने मिलकर उनके परिवार की करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़प ली। स्वरूप नगर पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

पूछताछ के दौरान प्रणव प्रताप ने बताया कि संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों के अलावा आरोपियों ने उनसे कई कोरे कागजों पर भी हस्ताक्षर कराए थे। सूत्रों के अनुसार, पुलिस को आशंका है कि इन कागजों का इस्तेमाल आरोपियों द्वारा अदालत में अपने बचाव के लिए किया जा सकता है।

प्रणव प्रताप ने यह भी बताया कि रॉयल क्लिफ और रिजेंटा होटलों के जिन कमरों में उन्हें रखा गया था, होटल के रजिस्टर में दोनों कमरे सुयश के नाम पर दर्ज हैं। उनके अनुसार, होटल के कमरों में उनसे विक्रय अनुबंध यानी सेल डीड भी कराए गए और रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाकर रजिस्ट्री कराई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी आरोपियों को उनसे कोई दस्तावेज तैयार कराना होता था, उससे करीब 24 घंटे पहले सुयश अस्थाना उन्हें नशे का इंजेक्शन देता था। प्रणव के मुताबिक, उन्हें नशे की इतनी आदत हो गई थी कि इंजेक्शन न मिलने पर उनका शरीर ऐंठने लगता था। हस्ताक्षर कराने के बाद उन्हें दोबारा इंजेक्शन दिया जाता था।

प्रणव प्रताप के अनुसार, शुरुआत में अनूप और सुयश ने किदवई नगर की दुकानों से संबंधित दस्तावेज अपने नाम कराए। इसके बाद फूलबाग स्थित राधा कुंज मकान का हिस्सा रचित ने अपनी बहन पूर्णिमा दीक्षित के नाम लिखवा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल्डरों का मुख्य फाइनेंसर रचित ही है और उनकी नजर परिवार की अन्य संपत्तियों पर भी थी।

प्रणव ने बताया कि करीब तीन महीने पहले फूलबाग में दर्ज कराई गई प्राथमिकी भी इसी कथित साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि होटल में बंधक बनाए जाने के दौरान जब उनकी मां अंबिका उनसे मिलने पहुंचीं, तो आरोपियों ने यह कहकर उन्हें वापस लौटा दिया कि प्रणव बहुत व्यस्त हैं। परिवार के अन्य सदस्यों से भी उन्हें मोबाइल पर बात नहीं करने दी जाती थी।

अगस्त 2026 में नशे के कारण उनकी तबीयत अधिक बिगड़ने पर पुराने घरेलू नौकर अजय को कुछ दिनों के लिए होटल में उनके साथ रखा गया था। प्रणव के अनुसार, आरोपी बार-बार होटल, कमरा और फ्लोर बदलते रहते थे, ताकि किसी को संदेह न हो।

प्रणव के बड़े भाई अद्वैत प्रताप ने बताया कि जब भी वह थाने में छोटे भाई को बंधक बनाए जाने की शिकायत करते थे, तो आरोपी इसे पारिवारिक विवाद बताकर पुलिस को गुमराह कर देते थे। अद्वैत के मुताबिक, बिल्डरों ने प्रणव के खाते में करीब दो करोड़ रुपये जमा कराए और बाद में खाली चेकों पर हस्ताक्षर कराकर सुयश और अनूप ने रुपये वापस भी ले लिए।

पुलिस अब होटल के कमरों की बुकिंग से संबंधित रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच करने के साथ-साथ कथित तौर पर नशे के इंजेक्शन पहुंचाने वाले व्यक्ति की पहचान करने की दिशा में भी जांच कर रही है। मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर की जानी बाकी है।