नई दिल्ली, एजेंसी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों को अब परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के घरों पर सरकार के गुंडे भेजे गए। राहुल गांधी के साथ रिया अहीर और पैलेट गन से घायल हुई लड़की समेत कई पीड़ित छात्र मौजूद थे। इन छात्रों ने प्रेसवार्ता के दौरान अपने अनुभव साझा किए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले छात्रों के साथ मारपीट की गई, उन्हें धमकाया गया और उनके घरों तक लोगों को भेजा गया।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों ने कोई हिंसा नहीं की, बल्कि वे बेहतर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा पेपर लीक रोकने की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाना कोई अपराध नहीं है। यदि छात्र व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं तो उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहिए, जो युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करे और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाए।
राहुल गांधी के साथ प्रेसवार्ता में छात्र आंदोलन से जुड़े कई युवा भी मौजूद थे। रिया अहीर ने कहा कि वह वही लड़की हैं, जो मुंबई पुलिस की गाड़ी के सामने खड़ी हुई थीं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 20 निर्दोष लड़कों को बचाने की कोशिश की थी। रिया ने आरोप लगाया कि अब उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।
कार्यक्रम में वह युवती भी मौजूद थी, जिसे प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन लगी थी। छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कार्रवाई और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने कहा कि हजारों युवाओं ने संविधान, भारत की अवधारणा और देश के भविष्य की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांग सुननी चाहिए, न कि उन्हें डराना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युवा मीडिया के सामने अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन गृह मंत्री और प्रधानमंत्री सामने आकर सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। राहुल गांधी ने दोहराया कि छात्रों की मांग केवल बेहतर शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षित भविष्य की है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों की आवाज उठाता रहेगा। राहुल गांधी ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई रोकने की मांग की।
