बोले- पीएम मोदी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए ज्ञानेश कुमार का इस्तेमाल कर रहे; इंडिया गठबंधन ने भी इस्तीफे और एसआईआर वापस लेने की मांग उठाई
नई दिल्ली, एजेंसी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध बुधवार को और तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी प्रक्रिया और नतीजों को प्रभावित करने के लिए उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा पर भी सवाल उठाया।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब इंडिया गठबंधन के दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। गठबंधन की बैठक में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को वापस लेने की मांग उठाई गई।
मतदाता सूची में बड़े बदलाव का दावा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि मतदाता सूची से करीब 13.3 करोड़ नाम हटाए गए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देते हुए मतदाता सूची में किए गए बदलावों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
खरगे ने बैठक में कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।
राहुल ने कानूनी सुरक्षा पर उठाया सवाल
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि उन्हें आजीवन व्यापक कानूनी संरक्षण क्यों प्राप्त है। इसी सवाल के आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर ज्ञानेश कुमार के इस्तेमाल का राजनीतिक आरोप लगाया।
हालांकि, राहुल गांधी की ओर से लगाए गए ये आरोप राजनीतिक दावे हैं। इनके संबंध में चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके भीतर होने वाली चर्चा और अलग-अलग सदस्यों की राय संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है तथा एसआईआर से जुड़े फैसले निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
आयोग की प्रक्रिया पर विपक्ष के सवाल
इंडिया गठबंधन की बैठक में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की। खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के साथ चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
खरगे ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई बार आपत्तियां दर्ज की हैं। विपक्ष ने इन आपत्तियों और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को सार्वजनिक किए जाने की मांग की है।
एसआईआर वापस लेने की मांग
विपक्षी गठबंधन ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को वापस लेने की मांग दोहराई है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर से संबंधित कार्रवाई निर्धारित नियमों और संस्थागत प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर बढ़े इस राजनीतिक विवाद ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की जवाबदेही को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
