कोलकाता, एजेंसी। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया और विवादित बयान से जुड़े मामले को कृष्णानगर जिला अदालत से विधाननगर की एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।

तृणमूल कांग्रेस की कृष्णानगर सांसद महुआ मोइत्रा को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सोमवार को उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल के नदिया जिले की अदालत से जारी गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने मामले को कृष्णानगर जिला अदालत से विधाननगर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में भेजने का आदेश दिया।

गिरफ्तारी वारंट क्यों रद्द किया?

महुआ मोइत्रा ने गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया था। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने वारंट पर अंतरिम रोक लगा दी थी। सोमवार को मामले की दोबारा सुनवाई हुई, जिसमें न्यायमूर्ति देबांशु बसाक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वारंट रद्द कर दिया। अदालत ने इस मामले से जुड़े कृष्णानगर जिला अदालत के अन्य आदेशों को भी रद्द कर दिया।

महुआ मोइत्रा के वकील अर्जुन नाग ने पहले सवाल उठाया था कि सांसद होने के कारण क्या कृष्णानगर अदालत के पास इस मामले की सुनवाई का अधिकार है। उन्होंने दलील दी थी कि मामले की सुनवाई सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत यानी एमपी-एमएलए कोर्ट में होनी चाहिए। कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस दलील को स्वीकार करते हुए संबंधित मामला उत्तर 24 परगना जिले के विधाननगर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया।

महुआ मोइत्रा पर भारतीय सेना और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर कथित तौर पर विवादित और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप था।

महिलाओं के तुलसी की लकड़ी की माला पहनने, बुर्का और हिजाब से जुड़ी उनकी कुछ टिप्पणियों को लेकर भी विवाद हुआ था। कृष्णानगर के एक निवासी ने उनकी टिप्पणियों को लेकर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था।

शिकायत में महुआ मोइत्रा पर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने, अलग-अलग धार्मिक समूहों के बीच तनाव पैदा करने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने और लोगों को डराने-धमकाने के आरोप लगाए गए थे।