नई दिल्ली, एजेंसी। भारत ने यूएन की उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें भारत में नस्लीय भेदभाव के आरोप लगाए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर रिपोर्ट को राजनीति से प्रेरित बताया है।
भारत ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (यूएन सीईआरडी) की देश के बारे में की गई टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने इसे ‘राजनीति से प्रेरित’ और बेहद ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसने 11-12 अगस्त को जिनेवा में सीईआरडी के तहत भारत की 11वीं सामायिक समीक्षा के बाद नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति के बयान पर गौर किया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह एक सामान्य समीक्षा थी और भारत ने रचनात्मक जुड़ाव की भावना के साथ इसमें हिस्सा लिया। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि नस्लीय भेदभाव से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धता अटूट है।
समीक्षा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश की बहुलता, विविधता और विशाल सामाजिक जटिलता को रेखांकित करते हुए मानवाधिकार और समानता सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को सामने रखा। भारत की ओर से यह भी कहा गया कि देश सभी नागरिकों के लिए समानता, गरिमा और अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
भारत ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हम स्थापित प्रक्रिया के माध्यम से समिति की टिप्पणियों का जवाब देंगे, लेकिन भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के नेतृत्व वाले अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधिमंडल ने समीक्षा बैठक के दौरान ही निराधार आरोपों या कन्वेंशन के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने की प्रवृत्ति को खारिज कर दिया था।”
मंत्रालय ने आगे कहा, “भारत रिपोर्ट में की गई किसी भी राजनीति से प्रेरित और बेहद दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी को पूरी तरह से खारिज करता है और इसकी कड़ी निंदा करता है।”
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में क्या कहा गया था?
मंत्रालय का यह बयान तब आया है जब ‘नस्लीय भेदभाव खत्म करने वाली संयुक्त राष्ट्र समिति’ ने भारत में कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा जातीय और जाति-धार्मिक समूहों, मूल निवासियों और आदिवासी लोगों (जिनमें अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति शामिल हैं) के खिलाफ बड़े पैमाने पर उल्लंघनों की खबरों पर चिंता व्यक्त की है।
