नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल मित्र देश ही नहीं, बल्कि साझा इतिहास, संस्कृति और विरासत से जुड़े साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं और आने वाले 25 वर्ष उनके लिए नई संभावनाओं और साझा विकास के अवसर लेकर आएंगे।
इंडोनेशिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को वहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह सम्मान 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। उन्होंने इंडोनेशिया की सरकार और जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वहां मिला आत्मीय स्वागत दोनों देशों के मजबूत और गहरे संबंधों का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों देशों का जुड़ाव रामायण और महाभारत काल से रहा है। नालंदा की ज्ञान परंपरा, संगीत, नृत्य, ऐतिहासिक स्मारक, सांस्कृतिक उत्सव और जन-जन के बीच संपर्क इन संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का वह देश है जो विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकासवाद की नीति पर चलता है। यही हमारी ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना का आधार है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र दूरी का नहीं, बल्कि एक सेतु का प्रतीक है, जो दोनों देशों को साझा भविष्य की ओर अग्रसर करता है।
मोदी ने कहा कि सदियों पहले गुजरात से व्यापारी और सूफी संत समुद्री मार्ग के जरिए इंडोनेशिया पहुंचे थे। वे अपने साथ भारतीय संस्कृति, विचार और जीवन-मूल्य भी लेकर गए थे। आज भी इंडोनेशिया की कला, संस्कृति और सामाजिक जीवन में उस ऐतिहासिक संबंध की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के सांसदों से भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक प्रगति और वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
