यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर प्रदर्शन, निजी बैंक खुले रहे; 28-30 सितंबर को फिर हड़ताल का ऐलान
कानपुर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर पांच दिवसीय बैंकिंग और पीएलआई के विरोध में शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने हड़ताल की। इसके चलते शहर की सरकारी बैंकों की सैकड़ों शाखाओं में कामकाज ठप रहा। बैंक शाखाओं के ताले नहीं खुले और कर्मचारियों-अधिकारियों ने क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। हालांकि, कुछ यूनियनें हड़ताल में शामिल नहीं हुईं।
सरकारी बैंकों की शाखाओं में बंदी रही, जबकि निजी बैंकों की शाखाएं खुली रहीं। इससे सरकारी बैंकों के ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मांगों को लेकर आंदोलन तेज
पंजाब नेशनल बैंक प्रोग्रेसिव एम्पलाइज एसोसिएशन के चेयरमैन संजय त्रिवेदी के नेतृत्व में माल रोड स्थित कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया। संयोजक रजनीश गुप्ता ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग का मुद्दा 8 मार्च 2024 को भारतीय बैंक संघ की ओर से स्वीकार किया जा चुका है। इसे सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन करीब ढाई वर्ष बीतने के बावजूद इस पर निर्णय नहीं हो सका है।
सह संयोजक प्रवीण मिश्रा ने कहा कि पीएलआई योजना भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों पर सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
सेवा शर्तों को संघर्ष का परिणाम बताया
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स के अंकुर मिश्रा और नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्पलाइज के जय प्रकाश मिश्रा ने कहा कि बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को मिली सेवा शर्तें किसी सरकार की ओर से उपहार में नहीं दी गई हैं। वेतन, अवकाश, स्थानांतरण सुरक्षा, पदोन्नति प्रक्रिया और अन्य सुविधाएं ट्रेड यूनियनों के दशकों के संघर्ष और द्विपक्षीय वार्ता का परिणाम हैं।
ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन के अंकुर द्विवेदी ने कहा कि बैंक कर्मचारियों ने हर परिस्थिति में देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग व्यवस्था को मजबूती प्रदान की है।
28 से 30 सितंबर तक फिर हड़ताल
यूनियन नेताओं ने बताया कि 11 सितंबर की हड़ताल के बाद 28, 29 और 30 सितंबर को फिर से हड़ताल की जाएगी। इसके अलावा 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया गया है।
बैंक कर्मचारी और अधिकारी बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं, लेकिन एकतरफा और भेदभावपूर्ण नीतियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
