नई दिल्ली, एजेंसी। लोकसभा स्पीकर द्वारा 20 बागी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के उल्लंघन के आरोप में नोटिस जारी करने को तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने बड़ी कामयाबी बताया है। उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत इन सांसदों को तत्काल अयोग्य ठहराने की मांग की है, क्योंकि ये कथित तौर पर एक पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतने के बाद दूसरी पार्टी में शामिल हो गए थे।

यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और अभिषेक बनर्जी की याचिका के बाद दो महीने की देरी से हुई है।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद सागरिका घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है। इन सांसदों पर आरोप है कि उन्होंने किसी दूसरी पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुने जाने के बाद किसी और पार्टी में शामिल होकर संविधान और दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन किया है।

घोष ने कहा कि आज जो हुआ है, वह एक बड़ी कामयाबी है। यह बहुत अहम और जरूरी है कि दो महीने बाद स्पीकर के ऑफिस ने आखिरकार कार्रवाई की है और उन 20 गद्दारों को नोटिस भेजा है, जो एक खास चुनाव चिह्न पर जीतने के बाद अब दूसरी पार्टी में शामिल हो गए हैं।

उन्होंने सांसदों पर जनता के जनादेश के साथ धोखा करने का आरोप लगाया और संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उन्हें तुरंत अयोग्य घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ये 20 गद्दार संविधान और कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने जनता के जनादेश, लोकतंत्र और संविधान के साथ धोखा किया है।

घोष ने कहा कि दसवीं अनुसूची के तहत वे तुरंत अयोग्य घोषित किए जाने के पात्र हैं, क्योंकि दसवीं अनुसूची बहुत स्पष्ट है कि सांसद विलय नहीं कर सकते, केवल पार्टियां ही विलय कर सकती हैं।

घोष ने कार्रवाई में हुई देरी की आलोचना करते हुए कहा कि स्पीकर के कार्यालय ने याचिका दायर होने के दो महीने बाद और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ही जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ये 20 सांसद, ये 20 गद्दार, तुरंत अयोग्य घोषित किए जाने के हकदार हैं।