बोले- अयोध्या में भव्य राम मंदिर सनातन परंपरा की बड़ी उपलब्धि, श्रद्धालु अफवाहों और दुष्प्रचार से रहें सतर्क

गोरखपुर, संवाददाता।

गोरखपुर में मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण से लेकर सनातन परंपरा और सामाजिक एकता तक कई मुद्दों पर अपने विचार रखे। गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1949 में अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला के प्राकट्य की घटना मंदिर निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनी थी। आज उसी जन्मभूमि पर भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर की भव्यता से कुछ लोग असहज हो सकते हैं और समाज में भ्रम तथा दुष्प्रचार फैलाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसमें अनावश्यक भ्रम या संशय की जगह नहीं होनी चाहिए।

सनातन परंपरा के प्रमुख केंद्रों का उल्लेख

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या का श्रीराम मंदिर, काशी का बाबा विश्वनाथ धाम, विंध्याचल का मां विंध्यवासिनी धाम, प्रयागराज का दिव्य कुंभ और वृंदावन का वैष्णव कुंभ सनातन परंपरा की समृद्ध विरासत और आस्था के प्रमुख प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि इन धार्मिक आयोजनों और केंद्रों से जुड़े लोगों को लेकर कुछ तत्व भ्रम फैलाने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए समाज को ऐसे प्रयासों के प्रति जागरूक रहना होगा।

वैष्णव कुंभ का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने वृंदावन में आयोजित वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में वर्ष 2019 में आयोजित कुंभ के बाद वृंदावन में वैष्णव कुंभ का आयोजन हुआ था। उस समय कोरोना महामारी की चुनौती मौजूद थी, इसके बावजूद बांके बिहारी लाल और राधारानी की कृपा से आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

उन्होंने इसे आध्यात्मिक शक्ति और आस्था के प्रभाव से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों में लोगों की श्रद्धा और सामाजिक सहभागिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गोरक्षपीठ सभी के कल्याण के लिए समर्पित

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शैव परंपरा की गोरक्षपीठ स्वयं को व्यापक सनातन परंपरा और लोककल्याण के लिए समर्पित मानती है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ किसी पंथ, संप्रदाय, व्यक्ति या जाति के साथ भेदभाव नहीं करती।

मुख्यमंत्री के मुताबिक अलग-अलग पंथों की अपनी पूजा पद्धतियां हो सकती हैं, लेकिन सभी के कल्याण की भावना व्यापक सनातन परंपरा में निहित है।

अलग-अलग दिशा में चलना बनेगा कमजोरी

मुख्यमंत्री ने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को मजबूत करने के लिए सभी पंथों और समुदायों को एक भावना और एकजुटता के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी यदि एकजुट होकर अपनी सामूहिक शक्ति का उपयोग करे तो बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

उन्होंने चेताया कि समाज का अलग-अलग दिशाओं और अलग-अलग गति से आगे बढ़ना उसकी कमजोरी का कारण बन सकता है।

संतों का लक्ष्य आने वाली पीढ़ियों का निर्माण

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संत और महापुरुष केवल वर्तमान को ध्यान में रखकर काम नहीं करते, बल्कि उनकी दृष्टि आने वाली पीढ़ियों के निर्माण पर भी रहती है। उन्होंने करीब 95 वर्ष पहले के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि जब देश गुलाम था और संसाधनों की कमी थी, तब महंत दिग्विजयनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी।

उन्होंने बताया कि शिक्षा के इस अभियान का नाम महाराणा प्रताप के स्वदेश, स्वधर्म और स्वाभिमान के आदर्शों को ध्यान में रखकर रखा गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ अपने कार्यों का व्यक्तिगत श्रेय लेने में विश्वास नहीं रखते थे। उनका मानना था कि गोरक्षपीठ हिंदू समाज और लोककल्याण की पीठ है तथा इसकी संपत्ति का उपयोग जनहितकारी कार्यों के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में गोरक्षपीठ के योगदान को आज भी अनुकरणीय बताया और कहा कि बालिका शिक्षा के लिए भी महंत दिग्विजयनाथ ने महत्वपूर्ण पहल की थी।