कानपुर: डार्क वेब से मंगवा रहे अमेरिकी और मलेशियाई गांजा-चरस, पॉश इलाकों में फैला तस्करों का जाल
कानपुर। शहर के पॉश इलाकों में तस्करों द्वारा डार्क वेब और व्हाट्सऐप कॉल के जरिए अमेरिकी और मलेशियाई गांजा-चरस की होम डिलीवरी किए जाने का मामला सामने आया है। इस अवैध कारोबार में अमीर घरों के युवक और कारोबारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने ऐसे लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है।
कानपुर के पॉश इलाकों में विदेशी गांजा और चरस की होम डिलीवरी की जा रही है। तस्कर डार्क वेब के जरिए खेप मंगाकर तिलक नगर, स्वरूप नगर, आर्य नगर और सिविल लाइंस जैसे इलाकों में सप्लाई कर रहे हैं। इनके ग्राहक आम लोग नहीं, बल्कि शहर के कारोबारी, अधिकारी और उनके बच्चे बताए जा रहे हैं।
मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो सामने आया कि तस्कर बेखौफ होकर घरों तक डिलीवरी कर रहे हैं। शातिर तस्कर व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क करते हैं और सप्लाई क्लोज ग्रुप (नजदीकी समूह) के माध्यम से करते हैं। तस्करों ने इन पॉश इलाकों को आपस में बांट रखा है। किसी समूह में 85 तो किसी में 65 और किसी में 45 लोग जुड़े हुए हैं।
संदेह होने पर तोड़ देते हैं संपर्क
तस्कर गांजा करीब 1500 रुपये प्रति ग्राम और चरस करीब 4500 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से बेच रहे हैं। यदि कोई नया ग्राहक संपर्क करता है तो उससे पहले पूछा जाता है कि उसने इससे पहले माल कहां से खरीदा था। ग्राहक का नाम बताने पर तस्कर अपने साथी से पुष्टि करते हैं। पुष्टि के बाद शुरुआती दौर में ग्राहक को अलग-अलग जगहों पर 10 ऑर्डर दिए जाते हैं। संदेह होने पर आरोपी तुरंत संपर्क खत्म कर देते हैं।
एल्डोराडो अपार्टमेंट के पास तस्कर गांजा देकर लौट गया
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम मंगलवार को तिलक नगर स्थित एल्डोराडो अपार्टमेंट के पास पहुंची। इससे पहले टीम के एक सदस्य ने कारोबारी के बेटे के नाम से तस्कर से ऑनलाइन संपर्क कर गांजे का ऑर्डर दिया था। करीब 15 मिनट बाद तस्कर स्कूटी से वहां पहुंचा। आसपास देखने के बाद उसने 1500 रुपये लिए और एक पैकेट थमा दिया। पैकेट में पौधे से काटी गई गांजे की हरी पत्तियां थीं।
कारोबारी के बेटे ने बताया कि पैकेट में करीब एक ग्राम शुद्ध गांजा था।
फुटवियर कारोबारी का बेटा बना तस्कर
सूत्रों के अनुसार, स्वरूप नगर के एक बड़े फुटवियर कारोबारी का बेटा मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल हो गया है। वह विदेश से बीज मंगाकर एक अपार्टमेंट में गांजे के पौधे उगा रहा है। ऑर्डर मिलने पर पौधों की ताजी पत्तियां काटकर पैकेट में पैक कर ग्राहकों को दी जाती हैं। उसके साथ सात-आठ युवक भी इस कारोबार में जुड़े हैं।
घंटाघर में सक्रिय है हेलमेट गैंग
घंटाघर इलाके में हेलमेट गैंग लोगों को मादक पदार्थ उपलब्ध करा रहा है। तस्कर हेलमेट पहनकर रहते हैं और गांजा, चरस व अफीम की सप्लाई करते हैं। ग्राहकों को देखकर ही उन्हें माल पहुंचाया जाता है।
भैरों घाट का तस्कर बना करोड़पति
भैरों घाट के पास कभी 30-40 रुपये की पुड़िया में गांजा बेचने वाला एक तस्कर आज करोड़पति बन चुका है। उसने कुछ महीने पहले काकादेव में करीब 75 लाख रुपये का मकान खरीदा है। कारोबार चलाने के लिए उसने आठ युवतियां रखी हैं, जिन्हें स्कूटी दी गई हैं। ऑर्डर मिलने पर वे घरों तक सप्लाई करती हैं।
क्या होता है डार्क वेब?
डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जो सामान्य सर्च इंजन पर दिखाई नहीं देता। इसे एक्सेस करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। वर्तमान समय में इसका इस्तेमाल मादक पदार्थों की अवैध खरीद-फरोख्त, चोरी किए गए डेटा, हैकिंग टूल्स की बिक्री और नकली दस्तावेजों के कारोबार जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता है।
पुलिस का दावा
एडीसीपी स्पेशल ऑपरेशन सुमित सुधाकर रामटेक ने कहा कि तस्कर चाहे जितना डिजिटल तरीका अपना लें, अंततः सप्लाई खुद ही करते हैं। पुलिस की टीमें लगातार सक्रिय हैं। शहर के पॉश इलाकों में अभियान चलाकर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

