कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को शासन से किडनी ट्रांसप्लांट की आधिकारिक अनुमति मिल गई है। अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी संचालन, डोनर पंजीकरण और स्टाफ की ट्रेनिंग की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिससे मरीजों को कम खर्च और रियायती दरों पर यह सुविधा मिल सकेगी।

कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में गुर्दा प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीजों के लिए यह राहत भरी खबर है। शासन और संबंधित एजेंसियों से हरी झंडी मिलने के बाद अस्पताल में ट्रांसप्लांट शुरू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि मंगलवार को शासन से किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति मिल गई है। अब अस्पताल में ट्रांसप्लांट शुरू किए जा सकेंगे। शासन ने निर्देश दिए हैं कि हर महीने अस्पताल में किए गए ट्रांसप्लांट मामलों की सूची महानिदेशालय और सोटो (स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन) के नोडल अधिकारी डॉ. आर हर्षवर्धन को भेजी जाएगी।

ओपीडी संचालन की दिशा में काम शुरू

अस्पताल में ट्रांसप्लांट यूनिट की तैयारी के साथ अलग से ओपीडी शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस ओपीडी में मरीजों के साथ डोनर का पंजीकरण भी किया जाएगा। जांच के बाद उपयुक्त डोनर से ही किडनी ली जाएगी।

मरीजों के परिजनों की काउंसलिंग की जाएगी और उन्हें किडनी डोनेट करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके बाद डोनर और परिजनों को डिस्ट्रिक्ट ऑथराइजेशन कमेटी के पास भेजा जाएगा, जहां से अनुमति मिलने के बाद ही प्रत्यारोपण किया जा सकेगा।

एसजीपीजीआई से ट्रेनिंग ले रहा है स्टाफ

किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रिया और पोस्ट ऑपरेटिव केयर को देखते हुए हैलट का नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ वर्तमान में एसजीपीजीआई लखनऊ में विशेष प्रशिक्षण ले रहा है। यह टीम सितंबर तक अपनी ट्रेनिंग पूरी कर कानपुर लौटेगी।

स्टाफ के लौटने के बाद ट्रांसप्लांट यूनिट पूरी क्षमता और दक्षता के साथ काम करना शुरू कर देगी।

पहले ट्रांसप्लांट की तैयारी अंतिम चरण में

अस्पताल में पहले ट्रांसप्लांट के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज गुलाटी, डॉ. समीर गोविल समेत चार यूरोलॉजिस्ट पहले ही प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

प्राचार्य ने बताया कि सितंबर में प्रशिक्षित स्टाफ के वापस आने और उपयुक्त डोनर मिलने के बाद पहला किडनी ट्रांसप्लांट करने की तैयारी है।

तैयार हो रही खर्च की रूपरेखा

अस्पताल प्रशासन ट्रांसप्लांट में आने वाले खर्च की रूपरेखा भी तैयार कर रहा है। एसजीपीजीआई में वर्तमान में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च लगभग तीन से पांच लाख रुपये तक आता है। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड, विधायक निधि, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री राहत कोष जैसी योजनाओं से भी मरीजों को सहायता मिल सकती है।

रोजाना 200 मरीज पहुंचते हैं किडनी ओपीडी में

हैलट अस्पताल की किडनी ओपीडी में प्रतिदिन करीब 200 मरीज आते हैं। इनमें 20 से अधिक मरीज डायलिसिस पर हैं। अस्पताल में रोजाना करीब 250 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। ऐसे मरीजों को भी किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च करीब 10 से 15 लाख रुपये तक आता है, जबकि हैलट में यह सुविधा कम खर्च और रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की तैयारी है।