केंद्र सरकार ने करीब 10 साल में पहली बार चीनी आयात करने का फैसला लिया है। चीनी अब डॉलर देकर विदेश से मंगाई जाएगी। इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, सवाल यह है कि क्या एथेनॉल नीति की समीक्षा का समय आ गया है? चीनी का घरेलू भंडार पिछले साल की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम हो गया है। इसकी एक प्रमुख वजह गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में बढ़ना माना जा रहा है।
पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक उछाल आया है। आगे रक्षाबंधन, गणेश महोत्सव और जन्माष्टमी जैसे त्योहार हैं, जिनमें मिठाई और प्रसाद के लिए चीनी की मांग बढ़ती है। इसके बाद नवरात्र, विजयदशमी और दीपावली जैसे बड़े पर्व आएंगे, जब चीनी की खपत और बढ़ जाएगी।
ऐसे में यदि समय रहते पर्याप्त चीनी का आयात नहीं किया गया तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। सरकार का कहना है कि चीनी महंगी होने की वजह एथेनॉल नीति नहीं, बल्कि खराब मौसम के कारण गन्ने की कम पैदावार और उसके चलते चीनी उत्पादन में आई कमी है।
फिर भी, घरेलू खाद्य सुरक्षा और त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग को देखते हुए एथेनॉल नीति पर एक बार फिर व्यापक विचार करना जरूरी नजर आता है।