नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय गृह मंत्रालय 9 जुलाई को देशभर के सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करेगा। इस बैठक में सीमा प्रबंधन, अवैध घुसपैठ तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ‘बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट एसपी कॉन्फ्रेंस-2026’ को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में दोपहर 2:30 बजे आयोजित होगा। बैठक में पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से लगने वाली भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर स्थित जिलों के पुलिस अधीक्षक तथा गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

इस सम्मेलन का उद्देश्य संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपाय तय करना है। चर्चा का मुख्य फोकस सीमावर्ती जिलों की जनसंख्या में हो रहे बदलावों तथा उनके आंतरिक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर रहेगा।

अधिकारियों से उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा करने और उन रुझानों का विश्लेषण करने की अपेक्षा की जा रही है, जिनका कानून-व्यवस्था और सीमा प्रशासन पर असर पड़ सकता है। सम्मेलन में सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श होगा।

बैठक का एक प्रमुख एजेंडा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार होने वाली अवैध घुसपैठ पर रोक लगाना भी होगा। इसके तहत बिना अनुमति देश में प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने तथा राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहतर बनाने की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी।

इसके अलावा, देश में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान के मौजूदा तरीकों की समीक्षा की जाएगी और पहचान प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। बिना वैध अनुमति भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों को वापस भेजने (निर्वासन) की प्रक्रिया की भी समीक्षा होगी।

अधिकारियों के बीच निर्वासन प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियों, कानूनी पहलुओं तथा राज्य सरकारों, केंद्रीय एजेंसियों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच आवश्यक समन्वय पर भी चर्चा होने की संभावना है, ताकि ऐसे मामलों का समयबद्ध और प्रभावी ढंग से निस्तारण किया जा सके। गृह मंत्रालय द्वारा सीमा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर सहयोग पर भी जोर दिए जाने की उम्मीद है।